शिमला। हिमाचल प्रदेश में बंद पड़ी फैक्ट्रियों, दवा कंपनियों और औद्योगिक परिसरों को लेकर नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने पुलिस को सतर्क किया है। आशंका जताई गई है कि कुछ स्थानों का इस्तेमाल अवैध रूप से सिंथेटिक नशीले पदार्थ तैयार करने के लिए किया जा सकता है। इस अलर्ट के बाद पुलिस और जांच एजेंसियों को संदिग्ध परिसरों की जांच, सत्यापन और औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं।

बंद फैक्ट्रियों और फार्मा परिसरों पर नजर

एनसीबी से मिले इनपुट के अनुसार, हिमाचल प्रदेश और सीमावर्ती क्षेत्रों में बंद औद्योगिक इकाइयों, दवा कंपनियों, गोदामों और दूरदराज के कृषि फार्मों में अवैध गतिविधियां संचालित होने की आशंका है। जांच एजेंसियों को ऐसे स्थानों पर विशेष निगरानी रखने को कहा गया है, जहां वैध कारोबार की आड़ में नशीले पदार्थों का अवैध निर्माण किया जा सकता है।

सिंथेटिक ड्रग्स कृत्रिम रसायनों से तैयार किए जाने वाले नशीले पदार्थ हैं, जो मानव शरीर और मस्तिष्क पर गंभीर दुष्प्रभाव डाल सकते हैं। इनके अवैध निर्माण और तस्करी में शामिल संगठित गिरोहों पर कार्रवाई के लिए देशभर में निगरानी बढ़ाई जा रही है।

दवा निर्माण की आड़ में अवैध कारोबार की आशंका

जांच एजेंसियों को आशंका है कि अवैध कारोबार में शामिल गिरोह बंद पड़ी औद्योगिक इकाइयों को किराये पर लेकर वहां गुप्त प्रयोगशालाएं स्थापित कर सकते हैं। दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल के नाम पर रसायनों की खेप मंगाकर उनका दुरुपयोग किए जाने की भी आशंका है।

इसके अलावा, दूरदराज के कृषि फार्मों और ऐसे परिसरों पर भी नजर रखी जा रही है, जहां संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाना अपेक्षाकृत मुश्किल हो सकता है।

हिमाचल पुलिस को क्या निर्देश दिए गए?

एनसीबी के अलर्ट के बाद पुलिस को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में बंद फैक्ट्रियों, गोदामों और फार्मा कंपनियों के परिसरों का सत्यापन करने को कहा गया है। औचक निरीक्षण के माध्यम से यह पता लगाने पर जोर दिया जा रहा है कि कहीं इन स्थानों पर अवैध गतिविधियां तो नहीं चल रही हैं।

एजेंसियां कच्चे माल की आपूर्ति, स्टॉक रजिस्टर और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की भी जांच पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। किसी संदिग्ध गतिविधि का पता चलने पर समय रहते कार्रवाई करना इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य है।

BBN में पहले भी सामने आ चुके हैं नशीली दवाओं से जुड़े मामले

बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (BBN) औद्योगिक क्षेत्र में नशीली दवाओं के अवैध निर्माण और तस्करी के खिलाफ पहले भी कार्रवाई की जा चुकी है।

सितंबर 2026 में नालागढ़ में टेपेंटाडोल से जुड़े मामले में छापेमारी के दौरान लाखों गोलियां और बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित कच्चा माल पकड़े जाने की जानकारी सामने आई थी। वहीं, मई 2026 में बद्दी से ट्रामाडोल और अल्प्राजोलम की 2.23 लाख से अधिक गोलियां जब्त की गई थीं।

इन मामलों के बाद अब जांच एजेंसियों का ध्यान दवा कंपनियों में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल, स्टॉक रिकॉर्ड और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की निगरानी पर भी है।

संगठित गिरोहों पर शिकंजा कसने की तैयारी

सिंथेटिक नशीले पदार्थों के अवैध निर्माण, तस्करी और उनसे जुड़े संगठित अपराध नेटवर्क को खत्म करने के लिए आतंकवाद निरोधी दस्ते (ATS) ने भी विशेष अभियान चला रखा है। इसमें तकनीकी खुफिया जानकारी जुटाने और संदिग्ध स्थानों पर सटीक कार्रवाई करने पर जोर दिया जा रहा है।

फिलहाल, एनसीबी का अलर्ट संभावित अवैध गतिविधियों को लेकर है। बंद दवा कंपनियों या फैक्ट्रियों में नशा बनाए जाने की आशंका को किसी विशेष इकाई के खिलाफ साबित हुआ मामला नहीं माना जाना चाहिए। अब पुलिस और संबंधित एजेंसियों के निरीक्षण तथा जांच से ही संदिग्ध गतिविधियों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।