
पूरी खबर:
हिमाचल प्रदेश में बिजली व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। मानसून सीजन में सामान्य से कम बारिश होने के कारण प्रदेश की जल विद्युत परियोजनाओं में बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है। उत्पादन में कमी और बढ़ती मांग के बीच कई क्षेत्रों में अघोषित बिजली कट लगने की स्थिति सामने आने लगी है।
राजधानी शिमला में भी बीते दो दिनों से पीक आवर्स के दौरान करीब 15-15 मिनट के बिजली कट लगने की जानकारी सामने आई है। इससे लोगों की परेशानी बढ़ गई है और आने वाले दिनों में बिजली आपूर्ति को लेकर चिंता भी बढ़ने लगी है।
मौजूदा समय में हिमाचल प्रदेश में रोजाना करीब 280 से 300 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन हो रहा है, जबकि प्रदेश की दैनिक खपत 380 लाख यूनिट से अधिक पहुंच गई है। ऐसे में प्रतिदिन करीब 80 से 100 लाख यूनिट बिजली की कमी सामने आ रही है।
इस कमी को पूरा करने के लिए हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड बाहरी स्रोतों से बिजली खरीदने का प्रयास कर रहा है। हालांकि उत्तरी ग्रिड और ओपन मार्केट से भी पर्याप्त बिजली उपलब्ध नहीं हो पा रही है। बिजली की मांग बढ़ने और बाजार में उपलब्धता सीमित रहने के कारण स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई है।
जल विद्युत उत्पादन में आई बड़ी गिरावट
हिमाचल प्रदेश की बिजली व्यवस्था मुख्य रूप से जल विद्युत परियोजनाओं पर निर्भर है। मानसून के दौरान सामान्य से करीब 11 फीसदी कम बारिश होने का सीधा असर नदियों और जलाशयों में पानी के प्रवाह पर पड़ा है। पानी की उपलब्धता कम होने से कई जल विद्युत परियोजनाओं में उत्पादन करीब 20 फीसदी तक घट गया है।
आमतौर पर बरसात के बाद हिमाचल में जल विद्युत उत्पादन में बढ़ोतरी देखने को मिलती है, लेकिन इस बार कम बारिश के कारण अपेक्षित उत्पादन नहीं हो पाया। यही स्थिति प्रदेश में बिजली की मांग और उपलब्धता के बीच अंतर बढ़ाने का एक प्रमुख कारण बनी है।
महंगी बिजली खरीदने की अनुमति, फिर भी पर्याप्त उपलब्धता नहीं
बिजली संकट से निपटने के लिए बोर्ड को महंगी दरों पर बिजली खरीदने की अनुमति दी गई है। इसके बावजूद ओपन मार्केट में पर्याप्त बिजली उपलब्ध नहीं हो पा रही है। अधिकारियों के अनुसार, देश के कई हिस्सों में बिजली की मांग बढ़ने के कारण बाजार में भी दबाव बना हुआ है।
देश के अन्य हिस्सों में भी बिजली की उपलब्धता पर दबाव
बिजली की उपलब्धता को लेकर दबाव केवल हिमाचल तक सीमित नहीं है। सितंबर महीने में देश में बिजली की कमी करीब 560 मिलियन यूनिट तक पहुंच गई, जो अगस्त 2023 के बाद सबसे अधिक बताई गई है।
कम बारिश के कारण जल विद्युत उत्पादन प्रभावित होने के साथ-साथ अक्षय ऊर्जा से दिन के समय बनने वाली बिजली को संग्रहित करने के लिए पर्याप्त बैटरी भंडारण व्यवस्था नहीं होने का असर भी बिजली आपूर्ति पर पड़ा है। इस वजह से ताप विद्युत पर निर्भरता बढ़ी है।
सितंबर में कोयला आधारित बिजली उत्पादन में सालाना आधार पर करीब 13.3 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। औद्योगिक गतिविधियों और मौसम संबंधी परिस्थितियों के कारण बिजली की पीक डिमांड बढ़ने का असर देश के बिजली तंत्र पर भी दिखाई दे रहा है।
सप्लाई सुचारू रखने के लिए प्रयास जारी
हिमाचल प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव ऊर्जा आरडी नजीम के अनुसार, प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश में इन दिनों बिजली की उपलब्धता को लेकर दबाव है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से बिजली की सप्लाई सुचारू रखने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए खुले बाजार से बिजली खरीदने के साथ-साथ अन्य राज्यों के साथ भी समझौते किए जा रहे हैं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि आने वाले दिनों में बिजली उत्पादन और खपत के बीच बढ़ता अंतर कितना कम हो पाता है और प्रदेश के लोगों को अघोषित बिजली कटौती से कब तक राहत मिलती है।
