हिमाचल प्रदेश में नगर निगम और शहरी निकाय चुनाव में इस बार मुकाबला काफी दिलचस्प और कांटे का होता नजर आ रहा है। प्रदेश के विभिन्न नगर निगमों और निकायों में पार्षद पदों के लिए करीब 1,410 उम्मीदवार चुनाव मैदान में डटे हुए हैं। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब सभी की नजर 6 मई पर टिकी हुई है, जब नामांकन वापसी की अंतिम तिथि है। इसी दिन उम्मीदवारों को चुनाव चिह्न भी आवंटित किए जाएंगे, जिससे चुनावी तस्वीर और साफ हो जाएगी। नगर निगम के चुनाव पार्टी सिंगल पर हो रहे हैं जबकि नगर परिषद और नगर पंचायत में पार्टी समर्थित प्रत्याशी चुनाव मैदान में डटे हैं।

चुनाव मैदान में बड़ी संख्या में उतरे निर्दलीय और बागी उम्मीदवारों ने प्रमुख राजनीतिक दलों भाजपा और कांग्रेस की चिंता बढ़ा दी है। दोनों दलों के अधिकृत प्रत्याशियों के सामने इन उम्मीदवारों की चुनौती चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर रही है। कई वार्डों में त्रिकोणीय और कहीं-कहीं बहुकोणीय मुकाबले की स्थिति बन गई है, जिससे जीत-हार का अनुमान लगाना मुश्किल हो गया है। स्थिति को संभालने के लिए भाजपा और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सक्रिय हो गए हैं। दोनों दलों के नेता बागी और निर्दलीय उम्मीदवारों को मनाने में जुटे हैं, ताकि वे नामांकन वापस ले लें और पार्टी उम्मीदवारों के लिए रास्ता आसान हो सके। इसके लिए लगातार बैठकों और संपर्क अभियान चलाए जा रहे हैं। कई जगहों पर स्थानीय स्तर पर समझौते के प्रयास भी हो रहे हैं।

बागी उम्मीदवारों को मनाने के लिए उन्हें भविष्य में संगठन या बोर्ड-निगमों में जिम्मेदारियां देने जैसे आश्वासन भी दिए जा रहे हैं। वहीं, निर्दलीय उम्मीदवारों को भी विभिन्न तरह के राजनीतिक और व्यक्तिगत लाभ के संकेत दिए जा रहे हैं, ताकि वे चुनावी मैदान से हट जाएं। हालांकि, अभी तक कई उम्मीदवार अपने निर्णय पर अडिग नजर आ रहे हैं। निर्दलीय उम्मीदवारों की बढ़ती संख्या ने दोनों प्रमुख दलों के लिए मुश्किल खड़ी कर दी है। ये उम्मीदवार वोटों का बंटवारा कर सकते हैं, जिससे किसी भी दल के अधिकृत प्रत्याशी को नुकसान उठाना पड़ सकता है। खासकर उन वार्डों में जहां मुकाबला पहले से ही कड़ा है, वहां निर्दलीयों की भूमिका निर्णायक बन सकती है। नगर निगम चुनाव में नामांकन वापसी के दिन ही चुनाव की असली तस्वीर सामने आएगी। यदि बड़ी संख्या में बागी और निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में बने रहते हैं, तो चुनाव परिणाम अप्रत्याशित हो सकते हैं। ऐसे में आने वाले 24 घंटे दोनों प्रमुख दलों के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि दल अपने बागियों को कितना मना पाते हैं और कितने उम्मीदवार अंत तक मैदान में डटे रहते हैं। इससे ही तय होगा कि निकाय चुनाव में किसका पलड़ा भारी रहेगा।