
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने फोरलेन और एनएच निर्माण की कंसल्टेंसी की टेंडर प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब टेंडर उस फर्म को नहीं मिलेगा, जो सबसे सस्ता ऑफर देगी, बल्कि उसे मिलेगा, जिसका तकनीकी स्कोर और ट्रैक रिकॉर्ड बेहतरीन होगा। पहले टेंडर 80:20 अनुपात में दिए जाते थे। 80 फीसदी तकनीकी और 20 फीसदी वित्तीय बोली पर। अकसर तकनीकी स्कोर में पास फर्म वित्तीय बोली में कम कीमत लगाकर ठेका हासिल कर लेती थी। लेकिन अब 100 फीसदी तकनीकी आधार पर ही ठेके आवंटित होंगे। वित्तीय बोली की प्रक्रिया पूरी तरह खत्म कर दी गई है। मंत्रालय ने डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) कंसल्टेंसी तैयार करने की रकम भी फिक्स कर दी है, जिससे गुणवत्ता से कोई समझौता न हो।
देशभर में भारी बारिश और भूस्खलन से राजमार्गों को बहुत नुकसान हुआ है। हिमाचल में ही इस वर्ष राष्ट्रीय राजमार्गों और फोरलेन को नुकसान का आंकड़ा एक हजार करोड़ से पार पहुंच गया है। हिमाचल में नुकसान की बड़ी वजह फोरलेन निर्माण के लिए तैयार की गई डीपीआर को माना जा रहा है। खुद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी मनाली-कीरतपुर की डीपीआर के निर्माण पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने कहा था कि मनाली फोरलेन पर हर साल हो रहे नुकसान को देखकर ऐसा लगता है कि घर में बैठकर डीपीआर बनाई गई है। अब मंत्रालय ने डीपीआर निर्माण के आधार यानी कंसल्टेंसी के लिए टेंडर प्रक्रिया को पूरी तरह से बदल दिया है। एनएचएआई हमीरपुर के परियोजना निदेशक विक्रम मीणा ने कहा कि मंत्रालय स्तर से डीपीआर कंसल्टेंसी के लिए टेंडर जारी हुआ है। इस मानसून में कीरतपुर-मनाली फोरलेन को 544 करोड़ रुपये की क्षति का अनुमान है।
नई शतों के तहत ऊना-हमीरपुर फोरलेन कंसल्टेंसी के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने टेंडर जारी किया है। एनएचएआई ने भी नई शतों के तहत शिमला-मटौर फोरलेन में बदलाव के लिए हमीरपुर रिंग रोड और भंगवार से चीलबाहल की डीपीआर कंसल्टेंसी के लिए टेंडर जारी किया है।
