
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि बिजली बोर्ड में अधिकारियों की संख्या अधिक होने के कारण ही कर्मचारियों को उनके वित्तीय लाभ नहीं मिल पा रहे हैं। पूर्व सरकारों और वरिष्ठ अधिकारियों की अनदेखी के चलते बिजली बोर्ड का घाटा बढ़ा है। प्रदेश की खराब वित्तीय हालत के लिए 40 साल की पुरानी व्यवस्थाओं को जिम्मेवार ठहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बीते वर्षों में कोई काम नहीं किया गया। प्रदेश पर 75,000 करोड़ का कर्ज और 10,000 करोड़ कर्मचारियों की देनदारियां विरासत में मिलने पर उन्होंने पूर्व की भाजपा सरकार को भी घेरा।
बुधवार को पीटरहॉफ में बिजली बोर्ड कर्मचारी यूनियन के दो दिवसीय सम्मेलन का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बोर्ड में कर्मचारियों को उनके वित्तीय लाभ देने के लिए 2200 करोड़ रुपये जारी किए है। वर्तमान सरकार के कार्यकाल में 2023 से सितंबर 2025 तक पेंशनधारकों को कंपनी की ओर से ग्रेच्युटी, चिकित्सा प्रतिपूर्ति, अवकाश नकदीकरण और पेंशन बकाया के रूप में कुल 662.81 करोड़ रुपये का भुगतान किया। इसी वर्ष के अंत तक 70 करोड़ और दिए जाएंगे। मेडिकल बिल एक सप्ताह में क्लीयर किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कर्मचारी यूनियन की मांग पर बोर्ड कार्यालयों के परिसर में बैठकों पर लगी रोक को तत्काल हटाने के निर्देश दिए। सरकार कर्मचारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों के पक्ष में है। उन्होंने बीते दिनों बिजली बोर्ड में चार्जशीट किए गए दो पदाधिकारियों को राहत देते हुए मामला वापस लेने की बात कही। कहा कि बोर्ड में सुधार करने की आवश्यकता है। कर्मचारियों के सहयोग के बिना यह संभव नहीं है। बोर्ड की रुकी हुईं पदोन्नतियां भी तुरंत प्रभाव से की जाएंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले पांच-छह माह वित्तीय तौर पर दिक्कत वाले रहने वाले हैं। इसके बाद हालात सुधरेंगे। उन्होंने कहा कि कई क्लास वन अधिकारियाें ने अभी तक बिजली सब्सिडी नहीं छोड़ी है। सरकार की सोच है कि जरूरतमंद लोगों को ही सब्सिडी का लाभ मिलना चाहिए। इसके लिए समाज का सहयोग भी अपेक्षित है।
सुक्खू ने कहा कि कोई भी सरकार और मुख्यमंत्री सख्त फैसले नहीं लेना चाहता। पटरी से उतर चुकी वित्तीय स्थिति को सुधारने के लिए दुखी मन से फैसले लेने पड़ रहे हैं। पिछली भाजपा सरकार ने 2022 में विधानसभा चुनाव से पहले 600 शिक्षण संस्थान खोल दिए। हमें कड़ा फैसलों लेकर इन्हें बंद करना पड़ा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऊहल प्रोजेक्ट से बिजली उत्पादन का खर्च 27 रुपये प्रति यूनिट आ रहा है। इसके लिए बोर्ड के बड़े अधिकारी जिम्मेदार हैं। बिजली बोर्ड में कर्मचारियों का खर्च प्रति यूनिट 2.50 रुपये है। 50 साल पहले बोर्ड बिजली उत्पादन भी करता था। अब सिर्फ वितरण का काम रह गया है। पूर्व के अधिकारियों ने पर्दे डालने का काम किया। इस कारण ही बोर्ड अब घाटे में पहुंच गया है।
