हिमाचल प्रदेश में 30 साल में निर्विरोध पंचायतों की प्रोत्साहन राशि 125 गुना बढ़ी है। वर्ष 1995 में पहली बार पंचायत निर्विरोध चुनी गई। उस समय मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने जनता से आह्वान कर निर्विरोध पंचायत चुनाव पर 20 हजार प्रोत्साहन राशि की घोषणा की। इसके बाद पंचायतों के निर्विरोध चुनने का सिलसिला जारी रहा। हालांकि वर्ष 2000 में इस राशि को बढ़ाकर एक लाख किया गया। इसके बाद वर्ष 2005 में यह राशि 10 लाख की गई। 2020 में तक यह राशि 10 लाख रही। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इस बार पंचायत निर्विरोध चुने जाने पर प्रोत्साहन राशि को बढ़ाकर 25 लाख रुपये किया है।

हिमाचल प्रदेश में पंचायतीराज व्यवस्था के इतिहास में अब तक 735 ग्राम पंचायतें निर्विरोध चुनी गई हैं जबकि जिला परिषद और पंचायत समिति स्तर पर आज तक एक भी बार सहमति नहीं बन पाई। पंचायत चुनावों के दौरान गांवों में आपसी सहमति से प्रतिनिधियों का चयन होने की परंपरा कई क्षेत्रों में कायम रही, लेकिन बड़े स्तर की संस्थाओं में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के चलते यह संभव नहीं हो सका। अब तक सरकार की ओर से ऐसी पंचायतों को करीब 638 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि जारी की जा चुकी है।

राशि का उपयोग पंचायतों में विकास कार्यों, आधारभूत सुविधाओं और सामुदायिक परियोजनाओं पर किया गया। सरकार का मानना रहा है कि निर्विरोध चुनाव से सामाजिक सौहार्द बढ़ता है और चुनावी खर्च तथा विवाद भी कम होते हैं। हिमाचल में वर्ष 1995 में पहली बार राज्य निर्वाचन आयोग के गठन के बाद पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव कराए गए। इससे वहले एमएलए और एमपी इन चुनाव को कराते थे। इससे पहले पंचायत प्रधान और अन्य प्रतिनिधियों का चयन पारंपरिक तरीकों से होता था। वर्ष 1995 में राज्य निर्वाचन आयोग के गठन के बाद चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमबद्धता आई। पंचायत चुनावों में मतदाता सूचियां, नामांकन प्रक्रिया, मतदान केंद्र और मतगणना की आधुनिक व्यवस्था लागू की गई। वर्तमान में पंचायत चुनाव पूरी तरह निर्वाचन आयोग की निगरानी में कराए जाते हैं।इस बार भी पंचायत चुनावों को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं। कई पंचायतों में निर्विरोध चुनाव कराने को लेकर प्रयास शुरू हो गए हैं, जबकि अधिकतर स्थानों पर मुकाबले की स्थिति बनने लगी है। पंचायतीराज विभाग के अतिरिक्त निदेशक केवल शर्मा ने बताया कि 1995 में पंचायत निर्विरोध चुने जाने पर 20 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि की जाती थी। समय समय पर यह राशि बढ़ी है।

वर्ष      पंचायतें निर्विरोध  प्रोत्साहन राशि
वर्ष 1995 पहली बार चुनाव 20 हजार
2002      107                1.07 करोड़
2005     300              300 करोड़
2010     106              106 करोड़
2015    120              120 करोड़
2020    102             1 02 करोड़