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शिमला: हिमाचल प्रदेश सरकार ने अपनी महत्वाकांक्षी 300 यूनिट निशुल्क बिजली योजना के तहत बड़ा कदम उठाते हुए 1.16 लाख अति निर्धन परिवारों की पहचान कर ली है।

सरकार का दावा है कि इस योजना का लाभ केवल उन्हीं परिवारों को मिलेगा, जो वास्तव में आर्थिक रूप से कमजोर हैं। अब अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी, जिसके बाद योजना को लागू करने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू होगी।मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की इस योजना का उद्देश्य बढ़ती महंगाई के बीच जरूरतमंद परिवारों को राहत देना है। इसके लिए ग्रामीण विकास विभाग ने पूरे प्रदेश में सात चरणों में विस्तृत सत्यापन अभियान चलाया।

चयन केवल आय के आधार पर नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए किया गया।योजना के लिए 75 हजार रुपये या उससे कम वार्षिक आय वाले परिवारों को प्राथमिकता दी गई है। इसके अलावा दिहाड़ी मजदूर, गंभीर बीमारी से जूझ रहे परिवार, दिव्यांग सदस्य वाले घर, विधवा, एकल और तलाकशुदा महिलाओं के परिवार तथा अनाथ बच्चों की देखभाल करने वाले परिवारों को भी विशेष प्राथमिकता दी गई है।ग्रामीण विकास विभाग ने पंचायत स्तर से लेकर जिला स्तर तक दस्तावेजों और सामाजिक स्थिति का गहन सत्यापन कराया।

पंचायत प्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी में कई चरणों की जांच के बाद अंतिम सूची तैयार की गई, ताकि केवल वास्तविक जरूरतमंद परिवारों को ही योजना का लाभ मिल सके।सरकार का मानना है कि हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली मिलने से हजारों गरीब परिवारों के बिजली बिल का बोझ कम होगा। इससे उनकी बचत बढ़ेगी और वे शिक्षा, स्वास्थ्य तथा अन्य जरूरी जरूरतों पर अधिक खर्च कर सकेंगे।

वहीं, सरकार ने बिजली उपभोक्ताओं की शिकायतों और बिजली आपूर्ति से जुड़े नियमों की समीक्षा के लिए 14 सदस्यीय बिजली आपूर्ति संहिता समीक्षा पैनल का भी पुनर्गठन किया है। इस पैनल में बिजली बोर्ड, उद्योग, होटल कारोबार, घरेलू उपभोक्ताओं और जलविद्युत क्षेत्र के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य बिजली सेवाओं को अधिक पारदर्शी और उपभोक्ता हितैषी बनाना है।