
शिमला: हिमाचल प्रदेश में 900 असिस्टेंट स्टाफ नर्सों की भर्ती को लेकर चल रहे विवाद में हाईकोर्ट ने सरकार को फिलहाल कोई राहत नहीं दी है। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान सरकार ने भर्ती पर लगी रोक हटाने और चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी करने की अनुमति मांगी, लेकिन हाईकोर्ट ने यह मांग ठुकरा दी।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने सरकार को निर्देश दिए कि पिछले तीन वर्षों में आउटसोर्स के माध्यम से की गई सभी नियुक्तियों का पूरा रिकॉर्ड दो सप्ताह के भीतर अदालत में पेश किया जाए। अदालत ने सरकार की नई भर्ती नीति पर भी सवाल उठाते हुए इसे युवाओं के हितों के विपरीत बताया।
सरकार ने अदालत को बताया कि नई नीति के तहत असिस्टेंट स्टाफ नर्सों की नियुक्ति केवल पांच वर्षों के लिए होगी और उन्हें 25 हजार रुपये मासिक फिक्स वेतन मिलेगा। साथ ही भविष्य में वरिष्ठता और अन्य वित्तीय लाभों का दावा नहीं किया जा सकेगा। इस पर याचिकाकर्ताओं ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि सरकार स्थायी रिक्त पदों को भरने के बजाय युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय कर रही है।सुनवाई के दौरान प्रधान सचिव स्वास्थ्य एम. सुधा और प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
मामले की अगली सुनवाई में सरकार को विस्तृत रिकॉर्ड और अपना पक्ष अदालत के सामने रखना होगा।इसी सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पॉक्सो मामलों की सुनवाई को लेकर सभी न्यायिक अधिकारियों को कानून का सख्ती से पालन करने के निर्देश भी दिए।
वहीं, कीरतपुर-नेरचौक-मनाली फोरलेन परियोजना में हो रही देरी पर भी नाराजगी जताते हुए संबंधित एजेंसियों को काम में तेजी लाने के आदेश दिए।क्या सरकार नई भर्ती नीति में बदलाव करेगी और 900 नर्सों की भर्ती पर लगी रोक कब हटेगी? इसका फैसला अब हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर टिका है।
