हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) पर कार्यरत महिला कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अनुबंध में प्रावधान न होने का हवाला देकर किसी भी महिला कर्मचारी को मातृत्व अवकाश से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने इसे हर महिला का वैधानिक अधिकार बताया है।

न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल की एकल पीठ ने कहा कि मातृत्व अवकाश किसी सेवा अनुबंध की शर्तों पर निर्भर नहीं करता। मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 के तहत गर्भवती महिला कर्मचारियों को मातृत्व लाभ देना नियोक्ता की कानूनी जिम्मेदारी है और इसे किसी भी स्थिति में नकारा नहीं जा सकता।

यह फैसला ईसीएचएस सेल कसौली में क्लर्क के पद पर कार्यरत रंजना की याचिका पर सुनाया गया। रंजना ने मातृत्व अवकाश के लिए आवेदन किया था, लेकिन विभाग ने यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया कि उनके अनुबंध में मातृत्व अवकाश का कोई प्रावधान नहीं है।

हाईकोर्ट ने विभाग द्वारा जारी दोनों आदेशों को रद्द कर दिया और प्रतिवादी विभाग को निर्देश दिए कि रंजना को पूरे वेतन के साथ मातृत्व अवकाश दिया जाए।

कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि समान कार्य करने वाली महिला कर्मचारियों के साथ केवल नियुक्ति के प्रकार के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता। यह फैसला भविष्य में अनुबंध पर कार्यरत हजारों महिला कर्मचारियों के लिए भी राहत का रास्ता खोल सकता हैl