विधायकों को अतिरिक्त सुरक्षा देने से राज्य सरकार ने मना कर दिया है। भाजपा के दो और कांग्रेस के एक विधायक को डबल गनमैन देने की मांग सरकार ने खारिज कर दी है। कांगड़ा, बिलासपुर और ऊना जिलों के इन विधायकों ने खुद को जान का खतरा बताते हुए मौजूदा एक-एक गनमैन को नाकाफी माना था और अतिरिक्त सुरक्षा की मांग की थी। सुरक्षा एजेंसियों के आकलन में तीनों का थ्रेट परसेप्शन इतना गंभीर नहीं पाया गया कि उन्हें दूसरा गनमैन उपलब्ध करवाया जाए। सुरक्षा समीक्षा समिति की सिफारिश के बाद सरकार ने तीनों प्रस्तावों को मंजूरी नहीं दी।

सुरक्षा समीक्षा समिति की बैठक में हुई चर्चा
हिमाचल प्रदेश सचिवालय में बुधवार को अतिरिक्त मुख्य सचिव आरडी नजीम की अध्यक्षता में हुई सुरक्षा समीक्षा समिति की बैठक में इन मामलों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी, सीआईडी के आईजी संतोष पटियाल और केंद्रीय खुफिया ब्यूरो (आईबी) के अधिकारी भी मौजूद रहे। सीआईडी और आईबी ने तीनों विधायकों की सुरक्षा को लेकर अपना आकलन प्रस्तुत किया। सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट और मौजूदा परिस्थितियों की समीक्षा के बाद समिति ने माना कि तीनों विधायकों के लिए एक-एक गनमैन पर्याप्त है। इसके बाद डबल गनमैन उपलब्ध कराने के प्रस्ताव खारिज कर दिए गए। विधायकों की अतिरिक्त सुरक्षा का मामला राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है। प्रस्ताव देने वालों में सत्तारूढ़ कांग्रेस और मुख्य विपक्षी दल भाजपा दोनों के विधायक शामिल हैं।

बैठक में 20 से अधिक मामलों पर चर्चा की गई। सुरक्षा समीक्षा समिति ने राष्ट्रपति निवास रिट्रीट छराबड़ा की सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा की। समिति ने मौजूदा सुरक्षा प्रबंधों पर संतोष जताते हुए इन्हें निर्धारित मानकों के अनुरूप पाया। अधिकारियों के अनुसार एक गनमैन की तैनाती पर सरकार का न्यूनतम 70 हजार रुपये प्रतिमाह खर्च होता है। इससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ता है। निजी सुरक्षा कर्मी करीब 30 से 35 हजार रुपये प्रतिमाह में उपलब्ध हो जाते हैं। ऐसे में जरूरत के आधार पर सुरक्षा उपलब्ध करवाने और कुछ मामलों में उसका खर्च संबंधित व्यक्ति से लेने के विकल्प पर भी विचार किया जा सकता है।

बैठक में पूर्व डीजीपी संजय कुंडू के साथ विवाद से चर्चा में आए निशांत शर्मा को उपलब्ध करवाई सुरक्षा पर हुए खर्च की वसूली करने का फैसला भी लिया गया। समिति ने माना कि उनकी सुरक्षा पर किया खर्च आवश्यक नहीं था। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था पर खर्च की राशि उनसे वसूल की जाएगी। वहीं, एक डॉक्टर की ओर से सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए दिए गए आवेदन को भी समिति ने खारिज कर दिया।