
हिमाचल में धारा 118 के तहत जमीन की मंजूरियों पर हाईकोर्ट ने मांगा पूरा हिसाब
शिमला। हिमाचल प्रदेश में बाहरी राज्यों के गैर कृषकों को जमीन खरीदने के लिए दी जाने वाली मंजूरियों को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से पिछले 10 वर्षों के दौरान हिमाचल में धारा 118 के तहत दी गई सभी मंजूरियों का विस्तृत रिकॉर्ड पेश करने को कहा है। अदालत ने यह भी पूछा है कि ये मंजूरियां किन आधारों पर दी गईं और आवेदनों को स्वीकार या खारिज करने के लिए क्या मापदंड अपनाए जाते हैं।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने सरकार से यह जानकारी भी मांगी है कि पिछले एक दशक में कितने आवेदन मंजूर हुए, कितने खारिज किए गए और आवेदन रद्द करने के पीछे क्या कारण रहे। इसके अलावा अदालत ने पूछा है कि धारा 118 के तहत मिलने वाली मंजूरियों से प्रोसेसिंग फीस, आवेदन शुल्क और स्टांप ड्यूटी के रूप में सरकार को कितना राजस्व प्राप्त होता है।
कुल्लू, कांगड़ा और सिरमौर की मंजूरियों का भी मांगा ब्योरा
हाईकोर्ट ने कुल्लू, कांगड़ा और सिरमौर के शेष क्षेत्रों में धारा 118 के तहत दी गई मंजूरियों की विस्तृत सूची भी तलब की है। अदालत ने हिमाचल के पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण, पर्यावरण संरक्षण और नियमों के पालन को लेकर चिंता जताई है।
मामले में अदालत ने सोलन के बड़ोग सहित शिमला और नाहन जैसे क्षेत्रों में धारा 118 के तहत मिली मंजूरियों के बाद हुए निर्माण कार्यों पर भी सवाल उठाए हैं। अदालत के समक्ष पेश जानकारी के अनुसार, कुछ परियोजनाओं में निर्धारित ऊंचाई संबंधी मानकों से अधिक निर्माण के मामले सामने आए हैं।
शिमला में 801 और बड़ोग में 187 मंजूरियां
उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक में सोलन जिले के बड़ोग क्षेत्र में गैर कृषकों को कुल 187 मंजूरियां दी गईं। इनमें 64 मंजूरियां जमीन खरीदने और 123 निर्मित ढांचे या फ्लैट खरीदने से संबंधित थीं।
वहीं, शिमला में कुल 801 मंजूरियां जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। सिरमौर जिले की नाहन तहसील में 270 मंजूरियां दी गईं, जिनमें 159 औद्योगिक एवं पर्यटन परियोजनाओं और 111 आवासीय एवं पर्यटन परियोजनाओं से संबंधित थीं।
निर्माण की ऊंचाई और पर्यावरण पर भी सवाल
अदालत ने पहाड़ी क्षेत्रों में तय मानकों से अधिक ऊंचाई वाले भवनों के निर्माण को लेकर भी चिंता जताई है। खबर के अनुसार, बड़ोग क्षेत्र की 21 बड़ी परियोजनाओं में से आठ में छह मंजिल से अधिक निर्माण संबंधी उल्लंघन पाए जाने पर निर्माण रोकने के नोटिस जारी किए गए हैं।
धारा 118 का उद्देश्य हिमाचल प्रदेश में जमीन के हस्तांतरण को नियंत्रित करना और राज्य के कृषि भूमि संबंधी हितों की रक्षा करना है। इसके तहत गैर कृषकों को जमीन खरीदने के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और सरकारी अनुमति की जरूरत होती है।
अब इस मामले में सरकार को पिछले 10 वर्षों की मंजूरियों, उनके आधार, आवेदन प्रक्रिया और राजस्व से जुड़ी जानकारी अदालत के समक्ष रखनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 7 दिसंबर को निर्धारित है।
