
हिमाचल प्रदेश के इतिहास में पहली बार पुलिस की पूरी जांच टीम को किसी मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा हुई है। वहीं, सभी दोषियों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। पूरे देश में भी यह अपनी तरह का पहला मामला होने के दावे भी किए जा रहे हैं। चार जुलाई 2017 को शिमला जिला के कोटखाई के महासू जंगल में दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली 16 साल की छात्रा की दुराचार के बाद हत्या कर दी गई थी। पूरे देश में आक्रोश दिखा। लोगों के भारी विरोध के बाद तत्कालीन सरकार ने एसआईटी का गठन किया था। मामले की जांच कर रही इस एसआईटी पर गुड़िया मामले में आरोपी बनाए गए युवक सूरज की पुलिस लॉकअप में हत्या का आरोप लगा।
हिमाचल प्रदेश के इतिहास में पहली बार पुलिस की पूरी जांच टीम को किसी मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा हुई है। वहीं, सभी दोषियों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। पूरे देश में भी यह अपनी तरह का पहला मामला होने के दावे भी किए जा रहे हैं। चार जुलाई 2017 को शिमला जिला के कोटखाई के महासू जंगल में दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली 16 साल की छात्रा की दुराचार के बाद हत्या कर दी गई थी। पूरे देश में आक्रोश दिखा। लोगों के भारी विरोध के बाद तत्कालीन सरकार ने एसआईटी का गठन किया था। मामले की जांच कर रही इस एसआईटी पर गुड़िया मामले में आरोपी बनाए गए युवक सूरज की पुलिस लॉकअप में हत्या का आरोप लगा।
आईजी जहूर हैदर जैदी ने 31 दिसंबर 2028 और डीएसपी मनोज जोशी ने 30 सितंबर 2039 को सेवानिवृत्त होना था।
नौकरी से बर्खास्त हो सकते हैं दोषी पुलिस अधिकारी और कर्मी
सूरज हत्याकांड में दोषी पाए गए सभी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की अब नौकरी से बर्खास्तगी हो सकती है। इनमें एक सेवानिवृत्त हो चुका है। सरकार के स्तर पर इसको लेकर मंथन शुरू हो गया है। हालांकि अभी सीबीआई कोर्ट चंडीगढ़ की विस्तृत जजमेंट का इंतजार किया जा रहा है। 18 जनवरी को दोषी करार होते ही गिरफ्तार होने के बाद गृह विभाग ने सात पुलिस अधिकारियों और कर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया था।
डीजीपी बोले, जजमेंट पढ़ने के बाद दे सकेंगे प्रतिक्रिया
आईजी जैदी सहित आठ पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को सीबीआई कोर्ट की ओर से सुनाई गई सजा पर हिमाचल के डीजीपी अतुल वर्मा ने कहा कि कोर्ट की जजमेंट पढ़ने के बाद ही इस मामले में कोई प्रतिक्रिया दी जा सकेगी।
