
बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने रिकांगपिओ में मंगलवार को पत्रकार वार्ता में कहा कि राज्य सरकार की ओर से सेब की खरीद-बिक्री को लेकर बागवानों पर किसी भी प्रकार की कोई पाबंदी नहीं लगाई गई है। उन्होंने उन अफवाहों का खंडन किया, जिनमें कहा जा रहा था कि बागवानों को बगीचों में सेब बेचने पर जुर्माना लगेगा। मंत्री ने जोर देकर कहा कि बागवान अपना सेब चाहे तो मार्केट यार्ड में बेचें, सीधे आढ़तियों को बेचें या अपने बगीचों से ही बेचें, उन पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
मंत्री ने यह भी बताया कि बागवानों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए मार्केट यार्ड या मार्केट यार्ड के बाहर शेड में काम कर रहे आढ़तियों को अपना लाइसेंस प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। जो आढ़ती सीधे बागवानों के बगीचे से सेब खरीदते हैं, उन्हें भी अपना सरकार की ओर से मान्यता प्राप्त लाइसेंस दिखाना होगा। यह कदम बागवानों को ऐसे लोगों के जाल में फंसने से बचाने के लिए उठाया गया है जो बाद में भुगतान नहीं करते। बैठक में सबसे बड़ी चिंता केंद्र सरकार की ओर से अमेरिकी सेब के आयात पर टैरिफ को लेकर जताई गई।
मंत्री ने कहा कि पहले अमेरिकी सेब पर 75 प्रतिशत टैरिफ था, जिसे घटाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया था। अब खबरें आ रही हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा पद संभालने के बाद नीति आयोग में अमेरिकी सेब पर टैरिफ को शून्य करने का फैसला किया गया है। इस फैसले को लेकर सभी हितधारकों ने एकमत से गहरी चिंता व्यक्त की। उनका मानना है कि टैरिफ शून्य होने से अमेरिका से आने वाले सेब पर कोई शुल्क नहीं लगेगा, जिससे हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड जैसे सेब उत्पादक राज्यों के बागवानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। बागवानों ने चेतावनी दी है कि यदि केंद्र सरकार ट्रंप के कहने पर टैरिफ को शून्य करती है, तो वे सड़कों पर उतर कर आंदोलन करेंगे।
प्रेस वार्ता में यह भी बताया गया कि पिछली बार की तरह इस बार भी यूनिवर्सल कार्टन को सख्ती से लागू किया जाएगा और सेब की बिक्री वजन के अनुसार ही होगी। बैठक में कुछ आढ़तियों की ओर से यूनिवर्सल कार्टन में 22 किलो से ज्यादा सेब मांगने और कुछ बागवानों द्वारा भी अधिक वजन पैक करने के मुद्दे पर चर्चा हुई। मंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि कोई आढ़ती अधिकतम सीमा से अधिक वजन का कार्टन लेता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बागवान संघ ने यहां तक कहा कि यदि बागवान भी ऐसा करते हैं तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।
