
पहाड़ी क्षेत्रों की ढलानदार जगह भूमि कटाव रोकने के लिए नौणी यूनिवर्सिटी ने पहल की है। इसमें विश्वविद्यालय की ओर से तैयार की गई वेटिवर घास भू-कटाव को रोकने में सहायक होगी। इसके तहत चंड़ीगढ़-भानुपल्ली रेल लाइन निर्माण के लिए खोदी गई पहाड़ियों में भूस्खलन को रोकने के लिए इसका प्रयोग किया जा रहा है। रेलवे लाइन का निर्माण कर रही कंपनी नौणी विवि से यह घास ले रही है। विवि के विशेषज्ञों की देखरेख में कंपनी की ओर से इसे संवेदनशील क्षेत्रों में लगाया जाएगा।
जानकारी के अनुसार फोरलेन, रेलवे लाइन समेत अन्य ढलानदार क्षेत्रों में वेटिवर घास से कटाव को रोकने की योजना पर काम किया जा रहा है। वेटिवर प्लांटेशन एक प्रकार की घास है, जो ट्रीटमेंट वाली जगहों और ट्रीटमेंट कार्य पूरा होने वाली जगहों पर लगाई जाएगी। इससे रेलवे लाइन किनारे पहाड़ियों पर भूस्खलन रोकने में मदद मिलेगी। यह घास जमीन के दो से ढाई मीटर नीचे जाती है। इससे पहाड़ियों की जड़ें मजबूत होंगी। इससे भूस्खलन की संभावनाएं कम होंगी।
यह घास एक प्राकृतिक अवरोधक के रूप में कार्य करते हुए पानी के बहाव को धीमा कर देती है और विशेषकर सीधी ढलानों पर भूमि कटाव को रोकती है। पंक्तियों में लगाए जाने पर वेटिवर घास एक दीवार की तरह काम करती है। इसकी जड़ें अतिरिक्त पानी को सोख लेती हैं और मिट्टी में पानी की मात्रा को कम करती हैं। इससे भूस्खलन की संभावनाएं कम हो जाती हैं।
वेटिवर घास (क्राइसोपोगोन जिजनियोइड्स ) दक्षिण भारत में उत्पन्न होने वाला एक बारहमासी पौधा है। चंडीगढ़-भानुपल्ली रेल लाइन के किनारे भूस्खलन वाले स्थानों पर इसका रोपण किया जाएगा। इससे भूस्खलन कम होगा। इसके लिए नौणी विवि के विशेषज्ञों ने भी मौके का निरीक्षण किया है। इसमें रेलवे लाइन का निर्माण कर रही कंपनी विशेषज्ञों की देखरेख में रोपाई कार्य करेगी। इस घास को करीब 10 किलोमीटर के क्षेत्रों में लगाया जाएगा। -डॉ. संजीव चौहान, निदेशक अनुसंधान, नौणी विवि सोलन
