हिमाचल प्रदेश के मेधावियों ने चुनाैतियों के बीच कड़ी मेहनत से नेट, जेआरएफ की बाधा को पार किया है। सिरमाैर जिले के कोलर पंचायत के उत्तमवाला गांव की हिना कुमारी ने जूनियर रिसर्च फेलोशिप (जेआरएफ) परीक्षा में देश भर में 45वीं रैंक हासिल की। उन्होंने 99.55 परसेंटाइल प्राप्त किए। विषम आर्थिक और पारिवारिक परिस्थितियों के बावजूद हिना ने मजबूत संकल्प और कठिन परिश्रम से परीक्षा पास की। हिना के पिता प्रवीण कुमार मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। मां सरिता देवी पैर में गंभीर चोट लगने के कारण काम करने में असमर्थ हैं। 

 सिरमाैर जिले के संगड़ाह के अंधेरी की साक्षी ठाकुर ने अंग्रेजी में यूजीसी नेट परीक्षा पास की। साक्षी ने 99.84 परसेंटाइल प्राप्त किए। पिता राजेंद्र ठाकुर और माता सुचिता ठाकुर बेटी की इस उपलब्धि से बहुत खुश हैं। साक्षी ठाकुर ने सफलता का श्रेय माता-पिता के साथ-साथ शिक्षकों में सुरेंद्र, राम किशन शास्त्री और हीरा पाल शर्मा को दिया। 

धर्मशाला के बगली पंचायत की अवंतिका काैंडल  ने यूजीसी नेट (मैनेजमेंट) परीक्षा में देशभर में 16वां स्थान हासिल किया। उन्होंने पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की। उन्होंने 226 अंक प्राप्त किए। इससे पहले अवंतिका जेआरएफ भी कर चुकी हैं। वे असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में सेवाएं देंगी। 

चंबा जिले के गरनोटा पंचायत के घाघन गांव के मनीश कुमार ने यूजीसी नेट और पीएचडी पात्रता परीक्षा पास की। मनीश ने संस्कृत में 83.06 प्रतिशत अंक अर्जित किए। मनीश के पिता मिस्त्री और मां गृहिणी हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उनके माता-पिता ने बेटे को पढ़ाई के लिए लगातार प्रोत्साहित किया। मनीश ने माता-पिता के सपनों को साकार करते हुए यह उपलब्धि हासिल की है। मनीश ने प्रारंभिक शिक्षा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कोटला से प्राप्त की। 

कुल्लू जिले के सैंज उपमंडल की देहुरीधार पंचायत के सतेश गांव की कुमारी संस्कृति ने पहले ही प्रयास में यूजीसी नेट कॉमर्स परीक्षा उत्तीर्ण की। उनकी इस उपलब्धि से गांव में खुशी का माहौल है। संस्कृति पंजाब विश्वविद्यालय से एमकॉम कर रही हैं। उन्होंने बीकॉम कुल्लू कॉलेज से की। संस्कृति के माता-पिता अध्यापक हैं।

कांगड़ा जिले के  धीरा उपमंडल के बलोटा गांव के निखिल ने बिना कोचिंग यूजीसी नेट परीक्षा 98.20 परसेंटाइल हासिल कर पास कर ली है। इस उपलब्धि के साथ निखिल ने न सिर्फ अपने गांव बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। निखिल की प्रारंभिक शिक्षा राजकीय प्राथमिक पाठशाला बलोटा से की।