चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर और डॉ. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी में कुलपति की नियुक्ति को लेकर राज्य सरकार व राजभवन आमने-सामने हैं।  राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने शनिवार को शिमला के ऐतिहासिक रिज पर पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी को उनकी पुण्यतिथि पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस दाैरान राज्यपाल ने पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में कहा कि कृषि और बागवानी विश्वविद्यालय में कुलपति नियुक्ति को लेकर लिया गया उनका फैसला सही था। कहा कि विवि के हित के लिए जो मैंने किया है, वह सही था। हाईकोर्ट की ओर से रोक लगाने पर कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कि वह यह प्रदेश की जनता पर छोड़ते हैं कि दोनों विश्वविद्यालय के लिए क्या सही है और क्या गलत है।

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि वे राज्यपाल का सम्मान करते हैं। विधानसभा से उनके पास कृषि व बागवानी वीसी से संबंधित नियुक्ति का बिल भेजा और काफी समय से उनके पास पड़ा है। अब उन्होंने आपत्ति लगाकर वापस भेजा है। सीएम सुक्खू ने कहा कि चांसलर की शक्तियां राज्य विधायिका में दी हैं और विधानसभा ने उन्हें कुलपति नियुक्त किया है। जब सरकार कोई निर्देश देती है तो उस पर अमल होना चाहिए। अब राज्य विधायिका ने कहा कि जो भी विवि होगी उसमें चांसलर गर्वनर होंगे। लेकिन वे सांविधानिक नहीं है, राज्य सरकार की ओर से दी गई शक्तियां हैं। कई विवि में राज्यपाल को कुलपति की शक्तियां नहीं है। जो भी प्रदेश में विवि बनी हैं, उसमें शक्तियां राज्य विधायिका ने दी हैं। राज्य विधायिका की कैबिनेट जब यह फैसला करती है कि राज्यपाल से बात की जाए। कैबिनेट ने राज्यपाल को चिट्ठी लिखी। इसके बाद सचिव कृषि ने सरकार के निर्देशों का हवाला देते हुए पदों को विज्ञापित नहीं करने के लिए राजभवन को अवगत करवाया। कैबिनेट ने राजभवन को वीसी नियुक्ति का विज्ञापन वापस लेने को कहा। उसकेबावजूद भी राजभवन ने आवेदन की तिथि को बढ़ा दिया। अब इस पर हाईकोर्ट ने भी संज्ञान लिया है। सीएम ने कहा कि इस पूरे मामले पर राज्यपाल से मिलकर बातचीत के जरिये समाधान निकाला जाएगा। राज्यपाल हमेशा ही हिमाचल के हितों के बात करते हैं और मुझसे चर्चा करते हैं। कहा कि और भी कई बिल राजभवन में लंबित पड़े हैं, जिनमें सुख आश्रय योजना, भ्रष्टाचार से संबंधित बिल भी शामिल हैं।

राज्यपाल ने वाजपेयी को एक राजनेता, दूरदर्शी नेता और अपने पूरे कार्यकाल में सर्वोच्च नैतिक मूल्यों को बनाए रखने वाले राजनेता कहा। राज्यपाल ने कहा कि अटल हिमाचल प्रदेश को अपना घर मानते थे और सार्वजनिक जीवन में हमेशा गरिमा बनाए रखते थे। शुक्ला ने कहा कि उन्होंने सत्ता के लिए या अपनी सरकार बचाने के लिए कभी भ्रष्टाचार का सहारा नहीं लिया। आज हम उन्हें जो सबसे बड़ी श्रद्धांजलि दे सकते हैं, वह है उनके ओर से दिखाए गए ईमानदारी और मूल्य आधारित राजनीति के मार्ग पर चलना। राज्यपाल ने आगे कहा कि वाजपेयी भारतीय राजनीति में एक महान हस्ती थे, जिनकी सभी दलों की ओर से प्रशंसा की जाती थी और उनकी सादगी, वाकपटुता और राजनेता कौशल के लिए पूरा देश उन्हें प्यार करता था।