
हिमाचल प्रदेश में 10 जिलों में कुल 3,60,859 मतदाता इस बार नगर निकायों की सरकार चुनने में अपनी अहम भूमिका निभाएंगे। कुल मतदाताओं में 1,80,963 पुरुष और 1,79,882 महिला वोटर शामिल हैं, जबकि 14 अन्य मतदाता भी सूची में दर्ज किए गए हैं। 51 नगर निकायों में 195 पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। जिलावार आंकड़ों में कांगड़ा सबसे आगे है, जहां 1,00,884 मतदाता पंजीकृत हैं। इसके बाद मंडी (65,720) दूसरे और सोलन (49,059) तीसरे स्थान पर हैं। सिरमौर में 39,004 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। अन्य जिलों में ऊना में 28,132, कुल्लू में 22,397, चंबा में 20,619, बिलासपुर में 16,770 और शिमला में 11,437 मतदाता दर्ज किए गए हैं। हमीरपुर जिला सबसे पीछे है, जहां केवल 6,837 मतदाता ही पंजीकृत हैं।
नगर निकाय चुनाव को लेकर भारतीय निर्वाचन आयोग ने मतदान प्रक्रिया को और अधिक सुगम बनाने के लिए अहम दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी मतदाता के पास मतदाता पहचान पत्र उपलब्ध नहीं है, तो वह निर्धारित 12 वैकल्पिक दस्तावेजों में से किसी एक के आधार पर भी मतदान कर सकता है।
वैकल्पिक दस्तावेज : ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, सरकारी या निजी संस्थानों के फोटोयुक्त आईडी, बैंक या डाकघर की पासबुक, राशन कार्ड, जाति प्रमाणपत्र, छात्र पहचान पत्र, संपत्ति के दस्तावेज, शस्त्र लाइसेंस, कंडक्टर लाइसेंस, पेंशन दस्तावेज और आश्रित प्रमाणपत्र, रेलवे या बस पास, अक्षम प्रमाण पत्र, स्वतंत्रता सैनानी प्रमाण पत्र और आधार कार्ड शामिल हैं।
31 मई तक मुख्यालय नहीं छोड़ पाएंगे डीसी और एसडीएम
हिमाचल प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों की घोषणा के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रदेश के सभी उपायुक्तों, उपमंडल अधिकारियों (एसडीएम), जिला पंचायत अधिकारियों और खंड विकास अधिकारियों को अपने-अपने मुख्यालयों में मौजूद रहने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि बिना अपरिहार्य परिस्थितियों के कोई भी अधिकारी मुख्यालय नहीं छोड़ेगा।
नगर निगम में एक लाख, नपं में 50 हजार खर्च कर सकेंगे
राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रत्याशियों के चुनावी खर्च की अधिकतम सीमा तय करते हुए स्पष्ट किया है कि नगर निगम के उम्मीदवार अधिकतम 1 लाख रुपये, नगर परिषद के 75 हजार रुपये और नगर पंचायत के प्रत्याशी 50 हजार रुपये तक ही खर्च कर सकेंगे। सभी प्रत्याशियों को चुनाव परिणाम घोषित होने के 30 दिनों के भीतर अपना पूरा खर्च विवरण संबंधित रिटर्निंग अधिकारी को जमा करना अनिवार्य होगा। चुनाव कार्यक्रम जारी होते ही संबंधित निकायों में आदर्श आचार संहिता प्रभावी हो गई है। इसके तहत किसी भी प्रत्याशी को जाति, धर्म, भाषा या क्षेत्र के आधार पर वोट मांगने की अनुमति नहीं होगी।
| क्रम | स्थानीय निकाय | संख्या | कुल पद | अनु जा | अनु ज जा | महिला |
| 1 | नगर निगम | 04 | 64 | 14 | 3 | 25 |
| 2 | नगर परिषद | 25 | 229 | 44 | 5 | 106 |
| 3 | नगर पंचायत | 22 | 156 | 31 | 4 | 64 |
| कुल | 51 | 449 | 89 | 12 | 195 |
51 शहरी निकायों के 449 वार्डों में मतदान
नगर निकाय चुनाव प्रदेश के 10 जिलों के कुल 51 शहरी स्थानीय निकायों में कराए जाएंगे। इन निकायों के 449 वार्डों में पार्षद चुनने के लिए मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। नगर निगमों की बात करें तो धर्मशाला, पालमपुर, मंडी और सोलन में कुल 64 वार्डों में मुकाबला होगा। इनमें सोलन और धर्मशाला में 17-17 वार्ड, पालमपुर और मंडी में 15-15 वार्ड शामिल हैं। जिलावार आंकड़ों में कांगड़ा जिला सबसे आगे है, जहां 80 वार्डों में चुनाव होंगे। इसके बाद मंडी में 65 और शिमला में 58 वार्डों में मतदान होगा। वहीं सोलन में 49 और ऊना में 48 वार्डों में चुनावी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। दूसरी ओर हमीरपुर जिला सबसे पीछे है, जहां केवल 16 वार्डों में ही मतदान होगा। चंबा में 27, सिरमौर में 33, बिलासपुर में 34 और कुल्लू में 39 वार्डों में पार्षद चुने जाएंगे।
वोटर सारथी एप पर मिलेगी मतदाता सूची
आयोग ने मतदाताओं और उम्मीदवारों की जानकारी को आसान बनाने के लिए वोटर सारथी और डीपीएमआईएस एप लॉन्च किए हैं। अब मतदाता वोटर सारथी एप के जरिये अपने और परिवार के सदस्यों का नाम मतदाता सूची में आसानी से देख सकते हैं। यह एप आयोग की वेबसाइट और गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। जिन मतदाताओं ने मोबाइल नंबर दर्ज कराए हैं, उन्हें मतदान से जुड़ी जानकारी एसएमएस से भी मिलेगी।
डीपीएमआईएस ऐप के जरिये मतदाता रियल-टाइम में उम्मीदवारों की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इसमें नामांकन, चुनाव चिह्न के साथ चल-अचल संपत्ति, और आपराधिक रिकॉर्ड जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां भी उपलब्ध होंगी। फोटो पहचान पत्र केवल पहचान का प्रमाण है, मतदान का अधिकार नहीं। आयोग की मतदाता सूची में नाम होना अनिवार्य है।
शहरी क्षेत्रों में न घोषणाएं होंगी, न ही नए काम
चुनाव आचार संहिता के दौरान शहरी क्षेत्रों में नई परियोजना की घोषणा, शिलान्यास व उद्घाटन भी नहीं हो सकेंगे। नई भर्तियों के विज्ञापनों, तबादला और पोस्टिंग के लिए भी चुनाव आयोग की अनुमति लेनी होगी। शहरी निकायों के चुनाव में 5000 कर्मचारी चुनाव ड्यूटी में लगेंगे। इसके अलावा राज्य निर्वाचन आयोग ने उपायुक्तों को निर्देश दिए है कि वह शहरी निकायों में संवेदनशील और अति संवेदनशील बूथों का चयन करें। चुनाव को शांतिपूर्ण बनाने के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। मतदान और मतगणना के दिन ड्राई डे रहेगा।
