एचपीयू शिमला ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्नातक पाठ्यक्रमों के लिए नई परीक्षा और ग्रेडिंग व्यवस्था लागू कर दी है। नई अधिसूचना के अनुसार अब विद्यार्थियों के लिए 75 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य होगी। निर्धारित उपस्थिति पूरी नहीं करने वाले छात्रों को एंड सेमेस्टर परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं मिलेगी। प्रथम वर्ष से दूसरे वर्ष में जाने के लिए पहले वर्ष के कुल क्रेडिट का कम से कम 50 प्रतिशत पास करना होगा। इसी तरह दूसरे वर्ष से तीसरे वर्ष में जाने के लिए पहले दो वर्षों के कुल क्रेडिट का 50 प्रतिशत हासिल करना जरूरी होगा।

तीसरे वर्ष से चौथे वर्ष में प्रमोशन के लिए पहले तीन वर्षों के सभी कोर्स पास करना अनिवार्य रहेगा। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई छात्र किसी सेमेस्टर में प्रवेश नहीं लेता है तो उसे अगले सेमेस्टर में प्रमोट नहीं किया जाएगा और उसे दोबारा उसी सेमेस्टर में प्रवेश लेना होगा। नई व्यवस्था में केवल उन्हीं छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति मिलेगी जिनके एडमिट कार्ड जारी होंगे और जिनका नाम विश्वविद्यालय की कट-लिस्ट में शामिल होगा। यदि कोई छात्र प्रवेश लिए बिना परीक्षा फॉर्म भरता है तो उसका फॉर्म रद्द कर दिया जाएगा और फीस भी वापस नहीं होगी।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति में पहली बार कॉलेजों और परीक्षा केंद्रों की जवाबदेही भी होगी। परीक्षा संचालन, मूल्यांकन या परिणाम प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई तो कार्रवाई तय है। गंभीर मामलों में परीक्षा केंद्र की मान्यता रद्द की जा सकती है। नई व्यवस्था में कॉलेजों को विद्यार्थी की उपस्थिति, आंतरिक मूल्यांकन, प्रैक्टिकल और परीक्षा रिकॉर्ड तय समय में विवि पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य किया गया है। यदि कॉलेज समय पर अंक अपलोड नहीं करते या रिकॉर्ड में त्रुटियां पाई जाती हैं तो विश्वविद्यालय प्रशासन संबंधित संस्थान और शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई कर सकेगा। नई अधिसूचना के अनुसार मूल्यांकन कार्य में लापरवाही, कॉपियों की जांच में देरी या गलत अंक प्रविष्टि को प्रशासनिक त्रुटि माना जाएगा। ऐसे मामलों में विश्वविद्यालय सीधे हस्तक्षेप करेगा।

परीक्षा शाखा कॉलेजों और मूल्यांकन केंद्रों की गतिविधियों पर डिजिटल निगरानी रखेगी

एनईपी में लागू की जा रही नई प्रणाली में ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन, क्लस्टर सेंटर और केंद्रीकृत मॉनिटरिंग व्यवस्था लागू की जा रही है। इसमें परीक्षा शाखा कॉलेजों और मूल्यांकन केंद्रों की गतिविधियों पर डिजिटल निगरानी रखेगी। यह भी स्पष्ट किया गया है कि परीक्षा प्रक्रिया में अनुचित साधनों का उपयोग करने वाले व पर विश्वविद्यालय के अनफेयर मीन्स नियम लागू होंगे। वहीं यदि किसी परीक्षा केंद्र में बार-बार गड़बड़ियां सामने आती हैं तो विश्वविद्यालय उस केंद्र को भविष्य की परीक्षाओं से बाहर कर सकता है। आरयूएसए के दौरान परिणामों में देरी, गलत अंक अपलोड होने और विषय कोड में त्रुटियों को लेकर लगातार शिकायतें सामने आई थीं। कई मामलों में छात्रों के रिजल्ट दोबारा संशोधित करने पड़े थे। नई अधिसूचना में विश्वविद्यालय ने संकेत दिए हैं कि इस बार सभी रिकॉर्ड ईआरपी प्लेटफॉर्म से जोड़े जाएंगे और कॉलेज स्तर पर की गई हर एंट्री की निगरानी विश्वविद्यालय करेगा।