आपदा प्रभावित क्षेत्रों में पुलों के स्थान को बदला जाएगा। बीते तीन साल से हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक आपदा के चलते पुलों को भारी नुकसान हो रहा है। इस बार भी प्राकृतिक आपदा के चलते 16 पुल ढह गए हैं। जहां पर यह पुल बने थे, अब उस स्थान पर इन पुलों को नहीं बनाया जाएगा। इन्हें ऐसी स्थानों पर स्थापित किया जाएगा, जहां नदी, नालों के पानी का बहाव पुल तक न पहुंच सके। पुलों को बनाने से पहले जियोलॉजिकल की टीम से सर्वे कराया जाएगा। इसमें जमीन का निरीक्षण और जमीन पक्की (रॉक) हो। हिमाचल में 10 पुल ऐसे है, जिन्हें हर बरसात में नुकसान होता है। कुल्लू, शिमला के सुन्नी, मंडी में ये पुल बने हैं। नदी के उफान पर आने के बाद इन पुलों को भारी नुकसान हो रहा है। जब तक पुलों का निर्माण नहीं हो जाता, प्रदेश सरकार की ओर से इन स्थानों पर वेली ब्रिज लगाए जाएंगे।

प्रदेश सरकार ने लोक निर्माण विभाग को भी निर्देश दिए हैं कि हिमाचल में पुलों का निरीक्षण किया जाए। हिमाचल में ऐसे कितने पुल हैं, जो खस्ता हालत में हैं। अगर पुल मरम्मत के लायक हैं तो उसे रिपेयर किया जाएगा। बदलने की जरूरत होगी तो उसका प्रस्ताव तैयार करें। हिमाचल में प्राकृतिक आपदा के चलते लोक निर्माण विभाग को करोड़ों का नुकसान हुआ है। जिला मुख्यालयों से कई इलाके कट गए हैं। सुन्नी का पुल क्षतिग्रस्त होने से लोगों को वाया तत्तापानी होकर जाना पड़ रहा है। तत्तापानी का पुल भी खतरे की जद में है, यहां वाहनों की आवाजाही बंद की गई है। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि पुलों के स्थानों को बदला जाएगा। पुलों को स्थापित करने से पहले जियोलॉजिकल की टीम से सर्वे कराया जाएगा।