हिमाचल प्रदेश के  जिला शिमला के छौहारा विकास खंड की तांगणू-जांगलिख पंचायत में सामने आए वृद्धावस्था पेंशन फर्जीवाड़े में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। प्रारंभिक जांच में कई दस्तावेज संदिग्ध पाए जाने के बाद जिला कल्याण अधिकारी ने चिड़गांव पुलिस थाने में केस दर्ज करवाया है। सूत्रों के मुताबिक, पुलिस को 44 लोगों के नाम दिए गए, जिन पर अनुचित तरीके से वृद्धावस्था पेंशन को हड़पने का आरोप है। अनुचित तरीके से पेंशन लेने वालों के अलावा कुछ अधिकारी और कर्मचारी भी जांच की जद में हैं। पुलिस ने मामले की तफ्तीश शुरू कर दी है। दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है।  पुलिस जांच में जैसे-जैसे आरोप सही पाए जाएंगे, वैसे ही आरोपियों के नाम एफआईआर में जोड़े जाएंगे। अमर उजाला ने छह मई के अंक में 44 से 54 साल आयु वाले भी डकार रहे वृद्धावस्था पेंशन… शीर्षक से इस मामले को प्रमुखता से उठाया था। खबर छपने के बाद मुख्यमंत्री ने विभाग को पूरे मामले की जांच करने के आदेश दिए थे। 

 इसके बाद सामाजिक कल्याण विभाग ने रिकॉर्ड खंगाला तो प्रारंभिक जांच में कई दस्तावेज संदिग्ध पाए गए। इसके बाद जिला कल्याण अधिकारी की शिकायत पर चिड़गांव पुलिस थाने में पुलिस ने केस दर्ज कर दिया है। हालांकि, अभी पुलिस के पास पूरा रिकॉर्ड नहीं आया है। बताया जा रहा है कि विभाग अपने स्तर पर भी दस्तावेजों का सत्यापन कर रहा है। जिनके दस्तावेज संदिग्ध पाए जा रहे हैं, वे पुलिस को सौंपे जा रहे हैं। आने वाले चार-पांच दिन के भीतर पुलिस को पूरा रिकॉर्ड मिलने की उम्मीद है। इसके बाद पुलिस आरोपियों के नाम एफआईआर में जोड़ेगी।

विभागीय सूत्रों के अनुसार इस मामले में पंचायत सचिव की भूमिका भी जांच के घेरे में आ गई है। आरोप है कि पंचायत स्तर पर दस्तावेजों के सत्यापन में लापरवाही बरती गई। यदि जांच में यह साबित होता है कि गलत दस्तावेजों को जानबूझकर आगे भेजा गया, तो पंचायत सचिव के खिलाफ भी कार्रवाई तय मानी जा रही है। बड़ा सवाल यह है कि जब ऑनलाइन और ऑफलाइन रिकॉर्ड में उम्र मेल नहीं खा रही तो सत्यापन की प्रक्रिया आखिर किस आधार पर पूरी की गई। पेंशन के लिए पंचायत से परिवार रजिस्टर नंबर से लेकर तहसील कल्याण अधिकारी कार्यालय में आवेदन करना होता है, लेकिन यहां पर पंचायत से परिवार रजिस्टर की नकल में खेल करने के आरोप हैं।
 

यह है पूरा मामला
शिमला की तांगणू-जांगलिख पंचायत में 44 लोगों पर 60 वर्ष की अनिवार्य आयु सीमा से पहले ही वृद्धावस्था पेंशन लेने का आरोप है। इनमें तांगणू गांव के 20 और जांगलिख के 24 लोग शामिल हैं। पेंशन का अवैध तरीके से लाभ लेने वालों में 25 पुरुष और 19 महिलाएं बताई जा रही हैं। इनकी उम्र 44 से 54 साल के बीच है। इनमें से कई लोग 2018-19 से वृद्धावस्था पेंशन का अनुचित लाभ ले रहे हैं, जबकि कुछ को 2021 के बाद जोड़ा गया है।

पूरे प्रदेश में पेंशन के मामलों का होगा सत्यापन : वर्मा
  सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सचिव सीपी वर्मा ने बताया कि अपात्रों की ओर से ली गई वृद्धा पेंशन के मामले में विभाग ने पुलिस में मामला दर्ज करवा दिया है। प्रदेश के सभी जिला कल्याण अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि इस प्रकार के मामलों का दोबारा सत्यापन किया जाए। पेंशन के आवंटन में विभागीय लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

एसएसपी ने ये कहा
पुलिस थाना चिड़गांव की टीम दस्तावेजों की सत्यता, आयु प्रमाण पत्र, पहचान पत्र और अन्य रिकॉर्ड की जांच कर रही है। सरकारी योजनाओं में फर्जी तरीके से लाभ लेने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। – गौरव सिंह, एसएसपी शिमला