हिमाचल प्रदेश के शहरी निकाय चुनावों के नतीजों ने राज्य की राजनीति में नए समीकरण बना दिए हैं। एक ओर कांग्रेस समर्थितों ने कांगड़ा, मंडी और कुल्लू जैसे अहम जिलों में प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए भाजपा के गढ़ों में सेंध लगाई। वहीं भाजपा समर्थितों ने बिलासपुर, सोलन और ऊना में एकतरफा बढ़त बनाकर सत्ता पक्ष को बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। कई नगर निकायों में अन्य किंगमेकर की भूमिका में उभरकर सामने आए हैं। सबसे अधिक चर्चा मंडी जिले की रही, जहां नेता प्रतिपक्ष के गृह जिले में कांग्रेस समर्थितों ने मजबूत उपस्थिति दर्ज कर भाजपा को कड़ी चुनौती दी। मंडी के निकायों में कांग्रेस समर्थितों की बढ़त को सत्ता पक्ष अपनी बड़ी राजनीतिक उपलब्धि मान रहा है। कांगड़ा और कुल्लू में भी कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों ने कई अहम सीटों पर जीत दर्ज कर संगठन की मजबूती दिखाई है।

उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के गृह जिला ऊना में कांग्रेस समर्थितों को अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। भाजपा ने यहां अधिकांश निकायों में बढ़त बनाकर कांग्रेस की रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक गलियारों में इसे सत्ता पक्ष के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। सोलन और बिलासपुर में भाजपा समर्थित पूरी तरह हावी रहे। सोलन में स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल का प्रभाव चुनावी नतीजों में दिखाई नहीं दिया। बिलासपुर में भाजपा ने संगठित चुनाव प्रबंधन के दम पर अधिकांश निकायों में बढ़त कायम रखी। मंत्री राजेश धर्माणी भी जिले में निकाय नहीं बचा सके।  

कांगड़ा के नगरोटा बगवां में कांग्रेस समर्थितों को निराशा मिली। पर्यटन निगम के अध्यक्ष आरएस बाली के प्रभाव वाले नगरोटा में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों की जीत ने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। शिमला में मुकाबला लगभग बराबरी का रहा। हालांकि नारकंडा नगर पंचायत निर्विरोध चुनी गई थी। यहां कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार होने का दावा किया है। इसके अलावा ठियोग में मुकाबला बराबरी का रहा है। सिरमौर और चंबा में भी किसी एक दल को स्पष्ट बढ़त नहीं मिली, जिससे अन्य पार्षदों और छोटे समूहों की भूमिका अहम हो गई है। हमीरपुर जिले की भोटा नगर पंचायत में कांग्रेस समर्थित साझा मोर्चा और अन्य उम्मीदवारों ने अप्रत्याशित प्रदर्शन कर दोनों प्रमुख दलों का गणित बिगाड़ दिया। सुजानपुर टिहरा में अन्य की भूमिका अहम हो गई है। निकाय चुनावों के ये नतीजे आगामी विधानसभा चुनावों से पहले दोनों दलों के लिए राजनीतिक संकेत माने जा रहे हैं। कांग्रेस जहां मंडी और कांगड़ा के प्रदर्शन से उत्साहित है, वहीं भाजपा ऊना, बिलासपुर और सोलन की जीत को संगठन की मजबूती का प्रमाण बता रही है।

जिला कांगड़ा में कांग्रेस के प्रदर्शन से धर्मशाला और पालमपुर नगर निगम में पार्टी की जीत के आसार बढ़ गए हैं। 31 मई को निगम चुनाव के परिणाम आने हैं। सोलन में भाजपा की जीत की राह आसान दिखती नजर आ रही है। उधर, मंडी नगर निगम में मुकाबला कड़ा बना हुआ है।

शिमला और हमीरपुर में सबसे ज्यादा मतदान, सोलन जिला रहा फिसड्डी

नगर निकाय चुनाव 2026 में मतदान का ट्रेंड पिछले चुनावों की तुलना में बदला नजर आया। कई जिलों में मतदाताओं का उत्साह बढ़ा, जबकि कुछ जिलों में मतदान प्रतिशत घटा। सबसे बड़ा उछाल शिमला और हमीरपुर में दर्ज किया गया।  शिमला में मतदान 2021 के 62.37 फीसदी से बढ़कर 77.36 फीसदी पहुंच गया, जबकि हमीरपुर में यह 69.77 से बढ़कर 78.89 फीसदी हो गया। मंडी में भी मतदान 64.54 से बढ़कर 71.23 फीसदी दर्ज किया गया। सोलन में बड़ा उलटफेर हुआ है। 2021 के निकाय चुनाव में सोलन 80.03 फीसदी के साथ प्रदेश में नंबर एक पर था। इन चुनावों में सोलन 64.20 के साथ प्रदेश में सबसे पीछे रहा। अन्य जिलों की बात करें तो कुल्लू 64.37 से बढ़कर 67.80, मंडी 64.54 से बढ़कर 71.23, चंबा 68.22 से आंशिक बढ़ोतरी के साथ 68.47, सिरमौर आंशिक बढ़ोतरी के साथ 67.04 से बढ़कर 67.24 के अलावा ऊना 76.07 से बढ़कर 77.00 फीसदी पहुंचा। हालांकि बिलासपुर में मतदान प्रतिशत 72.06 से घट कर 71.00 फीसदी और कांगड़ा 72.69 से घट कर 67.34 पहुंच गया। 

नगर निकाय चुनाव में किस पार्टी के समर्थितों को मिली कितनी सीटें

नगर परिषदकांग्रेसभाजपाअन्य
बिलासपुर291
सुजानपुर350
श्री नयनादेवी251
चंबा551
ऊना180
नूरपुर234
कांगड़ा810
नूरपुर630
नगरोटा बागवां241
देहरा520
ज्वालामुखी720
कुल्लू335
मंडी070
सरकाघाट331
सुंदरनगर292
नेरचाैक810
जोगिंद्ननगर132
रामपुर450
ठियोग331
परवाणू450
नलागढ़171
नाहन670
पांवटा साहिब049
सोलन360
मैहतपुर342


नगर पंचायत

नगर पंचायतकांग्रेसभाजपाअन्य
तलवार250
चुवाड़ी520
भोटा133
शाहपुर520
भुंतर430
निरमंड520
बंजार520
करसोग520
रिवालसर410
सुन्नी241
चौपाल520
कोटखाई250
जुब्बल610
चिड़गांव401
नेरवा041
अर्की340
कंडाघाट250
राजगढ़520
रामपुर061
दौलतपुर चौक520
टाहलीवाल250
अंब243