हिमाचल प्रदेश में घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को दी जा रही सब्सिडी तकनीकी खामियों की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। बिजली बोर्ड की ओर से 100 फीसदी केवाईसी और राशन कार्ड लिंकिंग अभियान के दौरान बड़े स्तर पर डाटा गड़बड़ियां सामने आई हैं। प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि कई उपभोक्ताओं की एक ही कंज्यूमर आईडी में कई नाम जोड़ दिए गए, जबकि कई मामलों में एक ही उपभोक्ता के नाम पर अलग-अलग राशन कार्ड दर्ज कर दिए गए। इससे हजारों पात्र उपभोक्ताओं की सब्सिडी रुक गई है और बिजली बिल बढ़ गए हैं।

बोर्ड के प्रबंध निदेशक आदित्य नेगी ने संबंधित अधिकारियों से डाटा एकत्रीकरण और सॉफ्टवेयर अपडेटिंग के दौरान हुई गलतियों पर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही बिजली मीटरों की राशन कार्ड से लिंकिंग की पूरी प्रक्रिया की रिपोर्ट भी तलब की गई है। सरकार ने अप्रैल 2026 से एक परिवार को अधिकतम दो घरेलू बिजली मीटरों पर ही सब्सिडी देने का प्रावधान लागू किया है। इसका उद्देश्य वास्तविक जरूरतमंद उपभोक्ताओं तक राहत पहुंचाना था, लेकिन तकनीकी त्रुटियों के कारण पात्र उपभोक्ता भी सब्सिडी से वंचित हो रहे हैं। बोर्ड के दफ्तरों में इन दिनों शिकायतों की बाढ़ आ गई है। उपभोक्ता बढ़े हुए बिजली बिल और सब्सिडी बंद होने की शिकायत लेकर कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं।

बोर्ड अधिकारियों के अनुसार नई सब्सिडी नीति लागू करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे सॉफ्टवेयर में डाटा अपडेटिंग के दौरान कई त्रुटियां हुई हैं। खासतौर पर राशन कार्ड और बिजली कनेक्शन की लिंकिंग में गड़बड़ियों के कारण सिस्टम उपभोक्ताओं की सही पात्रता तय नहीं कर पा रहा। कई परिवारों को डुप्लीकेट मानकर स्वतः ही सब्सिडी सूची से बाहर कर दिया गया।

वेबसाइट पर बनेगा अलग लिंक

बढ़ती शिकायतों के बीच बोर्ड प्रबंधन ने अब समाधान की दिशा में कदम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं। प्रबंध निदेशक ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जिन परिवारों के पास वैध रूप से दो बिजली मीटर हैं, उनके लिए बोर्ड की वेबसाइट पर अलग और स्पष्ट लिंक उपलब्ध कराया जाए, जिससे उपभोक्ता स्वयं जानकारी अपडेट कर सकें। साथ ही डाटा की दोबारा जांच और सॉफ्टवेयर सुधार की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

दस्तावेज सत्यापन कराने की अपील

बिजली बोर्ड ने प्रभावित उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अपने नजदीकी बिजली कार्यालय में जाकर राशन कार्ड, आधार और बिजली कनेक्शन संबंधी दस्तावेजों का सत्यापन करवाएं, जिससे पात्रता सही तरीके से दर्ज हो सके और सब्सिडी का लाभ बहाल किया जा सके।