हिमाचल प्रदेश में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की फोरलेन परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण में करोड़ों रुपये की अनियमितताओं का मामला सामने आया है। इंजीनियर-इन-चीफ परियोजना प्रदेश लोक निर्माण विभाग एसपी जगोता ने प्रदेश की 20 से अधिक विशेष भूमि अधिग्रहण इकाइयों और सक्षम प्राधिकरणों को पत्र लिखकर जवाब तलब किया है। उन्होंने मुआवजे, अवाॅर्ड राशि, केंद्र से प्राप्त धनराशि और बकाया राशि के आंकड़ों में विसंगतियों पर नाराजगी जताई। सभी इकाइयों को तत्काल पारदर्शी और सटीक आंकड़े प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

इस पत्र की प्रति उच्च अधिकारियों और संबंधित विभागों को भी भेजी गई है। बताते चलें कि 31 जुलाई 2025 को शिमला में लोक निर्माण विभाग के सचिव की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में उक्त परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण की प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक में उपस्थित विशेष भूमि अधिग्रहण इकाइयों और सक्षम प्राधिकरणों ने अपनी प्रगति का ब्योरा प्रस्तुत किया। इस दौरान गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं। एसएलएयू और सीएएलए की ओर से घोषित मुआवजा राशि, अवाॅर्ड राशि पर लगाया गया 2.5 प्रतिशत प्रशासनिक व आकस्मिक शुल्क, पुरस्कार राशि और शुल्क का योग, केंद्र सरकार से प्राप्त धनराशि, प्रभावितों को वितरित मुआवजा, अभी तक वितरित न हुई राशि, प्रशासनिक व आकस्मिक शुल्क पर खर्च की विसंगतियां बड़ी थीं, जो सामने आई।

यह भी सामने आया था कि कई परियोजनाओं में अधिग्रहीत भूमि पर अभी तक कोई निर्माण कार्य शुरू ही नहीं हुआ है। इंजीनियर-इन-चीफ ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि प्रस्तुत रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में भारी अंतर है, जो स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने सभी इकाइयों को निर्देश दिए कि वे अपने रिकॉर्ड का संबंधित भूमि अधिग्रहण अधिकारियों के साथ समन्वय कर सही आंकड़े प्रस्तुत करें।  उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सक्षम प्राधिकारियों के रिकॉर्ड में ही इतनी विसंगतियां हैं, तो धरातल पर स्थिति कितनी खराब होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने शुरू से ही भूमि अधिग्रहण और मुआवजे में अनियमितताओं का मुद्दा उठाया था। समिति का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों और यहां तक कि प्रधानमंत्री कार्यालय को भी इस बारे में अवगत कराया, लेकिन समय रहते कोई कार्रवाई नहीं हुई। समिति के एक सदस्य ने बताया कि कई प्रभावितों को अभी तक पूरा मुआवजा नहीं मिला है, जबकि कुछ मामलों में मुआवजा राशि गलत व्यक्तियों को वितरित होने की शिकायतें भी सामने आई हैं। 

पत्र के माध्यम से कांगड़ा, मंडी, बिलासपुर, हमीरपुर, सोलन, चंबा, ऊना, सिरमौर और शिमला जिलों की 20 इकाइयों से जवाब तलब किया गया है। इनमें पूछा है कि इन परियोजनाओं के लिए कितनी भूमि की जरूरत थी? अब तक कितनी भूमि का अधिग्रहण हुआ? अधिग्रहित भूमि में से कितनी पर अभी तक कोई काम शुरू नहीं हुआ? कितने अवाॅर्ड घोषित किए गए और कितने शेष हैं? कितना पैसा केंद्र सरकार से प्राप्त हुआ? कितनी राशि वितरित हुई और कितनी बकाया है? बकाया राशि कहां जमा है? कितने इंतकाल (म्यूटेशन) पूरे हुए और कितने बाकी हैं? जगोता ने कहा कि अरबों रुपये के मुआवजे का आबंटन हो चुका है, जिसमें भूमि, पेड़-पौधों और संरचनाओं का मुआवजा शामिल है, लेकिन प्रस्तुत आंकड़े आपस में मेल नहीं खा रहे।