
हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के चीफ इंजीनियर विमल नेगी की मौत मामले में एएसआई पंकज की गिरफ्तारी के बाद अब कई अधिकारी और कर्मचारी सीबीआई की जांच की जद में हैं। पावर कॉरपोरेशन और पुलिस विभाग के कुछ लोग सीबीआई के रडार पर हैं। जांच एजेंसी के पास ऐसे दस्तावेज और कॉल डिटेल हैं, जिनसे कई अफसरों की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सीबीआई की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मामले से जुड़े कुछ लोगों ने न केवल सबूतों के साथ छेड़छाड़ की, बल्कि घटनाक्रम को दबाने के लिए भी दबाव बनाया।
एएसआई पंकज की गिरफ्तारी के बाद पावर कॉरपोरेशन और पुलिस विभाग में हड़कंप मचा है।आने वाले दिनों में पूछताछ का दायरा बढ़ेगा और कुछ और बड़े नाम सामने आ सकते हैं। सीबीआई इस मामले में परिजनों की ओर से जाहिर हत्या, षड्यंत्र और भ्रष्टाचार की आशंकाओं पर भी तहकीकात कर रही है। हाईकोर्ट ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) ओंकार शर्मा की प्रशासनिक जांच रिपोर्ट और डीजीपी अतुल वर्मा के हलफनामे को आधार बनाकर इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के आदेश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने कहा कि सीबीआई की जांच टीम में हिमाचल कैडर का कोई अधिकारी शामिल नहीं होगा। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने फैसले में कहा था कि विमल नेगी की मौत से पहले उनके परिवार वालों ने उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट मुख्यमंत्री, गृह विभाग और सीआईडी को दी थी। दो महीने बीत जाने के बाद भी शिमला पुलिस की एसआईटी ने परिजनों की ओर से लगाए आरोपों के आधार पर कोई कार्रवाई नहीं की।
उल्लेखनीय है कि विमल नेगी की मौत के मामले की जांच के बाद अतिरिक्त मुख्य सचिव ओंकार शर्मा, हिमाचल प्रदेश पुलिस के तत्कालीन महानिदेशक डॉ. अतुल वर्मा और शिमला के पुलिस अधीक्षक संजीव गांधी को छुट्टी पर भेज दिया गया था। इस मामले में अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रदेश पुलिस महानिदेशक और एसपी शिमला ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में अलग-अलग जांच रिपोर्ट और स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की थी। उस समय यह बात उठी कि महाधिवक्ता कार्यालय को बाईपास किया गया था।
अपने फैसले में हाईकोर्ट ने कहा था कि एसआईटी ने दो महीने से अधिक समय से इस संबंध में कोई ठोस जांच नहीं की है, जबकि मृतक का परिवार शुरू से ही संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की शिकायत कर रहा है। कोर्ट ने उम्मीद जताई है कि सीबीआई निष्पक्ष और शीघ्रता से जांच पूरी करेगी। मामला आत्महत्या से जुड़ा है या हत्या से, सीबीआई इसके बारे में सच्चाई सामने आएगी। हिमाचल प्रदेश के डीजीपी और एसआईटी के बीच जांच को लेकर मतभेद के चलते मामला सीबीआई को सौंपा जा रहा है। अदालत ने एसीएस और डीजीपी की रिपोर्ट के आधार पर एसपी शिमला की एसआईटी की जांच पर भी प्रश्नचिह्न लगाए हैं।
विमल नेगी मौत मामले में अतिरिक्त मुख्य सचिव ओंकार शर्मा को न्यायालय में बिना अनुमति एफिडेविट दायर करने पर अनुशासनहीनता के तहत जबरन छुट्टी पर भेजा गया था। एसीएस ओंकार शर्मा, तत्कालीन डीजीपी अतुल वर्मा, पावर कॉरपोशन के अधिकारी देसराज और हरिकेश मीणा को छुट्टी भेजकर विभाग वापस लेकर अन्य अधिकारियों को दे दिए गए थे।
10 मार्च 2025: चीफ इंजीनियर विमल नेगी शिमला से रहस्यमयी परिस्थितियों में लापता हुए।
11 मार्च: पत्नी किरण नेगी की शिकायत पर थाना सदर में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की गई।
15 मार्च: डीजीपी ने एडीजीपी हेडक्वार्टर ज्ञानेश्वर सिंह की निगरानी में डीएसपी अमित कुमार की अध्यक्षता में एसआईटी बनाई।
18 मार्च : विमल नेगी का शव जिला बिलासपुर में थाना तलाई के अंतर्गत गाह धनीपखर में गोबिंद सागर झील से बरामद।
19 मार्च: एम्स बिलासपुर में पोस्टमार्टम करने के बाद शव परिजनों को सौंपा गया।
19 मार्च: शाम को परिजनों ने शव एचपीपीसीएल मुख्यालय बीसीएस शिमला में रखकर चक्का जाम और प्रदर्शन किया। उन्होंने कॉरपोरेशन के उच्च अधिकारियों पर प्रताड़ित और गलत काम करने के लिए नेगी पर दबाव बनाने के आरोप लगाए।
19 मार्च : किरण नेगी की शिकायत पर थाना न्यू शिमला में कॉरपोरेशन के निदेशक देशराज, एमडी हरिकेश मीणा और निदेशक शिवम प्रताप सिंह के खिलाफ आत्महत्या का उकसाने का मामला दर्ज।
19 मार्च: प्रदेश सरकार ने निदेशक देशराज को सस्पेंड किया और आईएएस व एमडी पावर कॉरपोरेशन हरिकेश मीणा को पद से हटाया।
19 मार्च: प्रदेश सरकार ने हाई पावर कमेटी का गठन किया गया। इसका जिम्मा अतिरिक्त मुख्य सचिव ओंकार शर्मा को सौंपा गया।
20 मार्च: एसपी शिमला ने एएसपी नवदीप सिंह की अध्यक्षता में विमल नेगी के मौत के कारणों की जांच के लिए एसआईटी गठित की।
26 मार्च: प्रदेश उच्च न्यायालय ने देशराज की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की।
4 अप्रैल : देशराज को सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत ।
7 अप्रैल: आईएएस हरिकेश मीणा को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिली।
21 अप्रैल विमल नेगी की पत्नी ने सीबीआई जांच की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
21 मई: हाईकोर्ट ने सीबीआई को जांच सौंपने की याचिका का फैसला सुरक्षित रखा।
23 मई: हाईकोर्ट ने विमल नेगी मौत के मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के निर्देश दिए।
