
शिमला से सटे औद्योगिक क्षेत्र शोघी में वस्तु एवं सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण (जीएसटी ट्रिब्यूनल ) बनेगा। केंद्र सरकार ने अन्य राज्यों की तर्ज पर हिमाचल में भी जीएसटी ट्रिब्यूनल बनाने का निर्णय लिया है। ट्रिब्यूनल शोघी में भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) भवन में स्थापित किया जाएगा। यहां पर बीएसएनएल के ट्रांसमिशन का कार्यालय है। इस भवन को जीएसटी ट्रिब्यूनल में स्थानांतरण करने की कवायद शुरू कर दी गई है। इसके लिए बाकायदा केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर विभाग (सीजीएसटी) और बीएसएनएल को प्रस्ताव भेजा है। अब लीज/रेंट एग्रीमेंट की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उद्योग निदेशालय के माध्यम से प्रस्ताव मंजूरी के लिए सरकार को भेजा जाएगा।
अधिकारियों के मुताबिक शोघी को औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण जीएसटी ट्रिब्यूनल के लिए चुना गया है। ट्रिब्यूनल में चार बेंच (फुल बेंच) बैठेंगी। इसमें दो न्यायाधीश और दो तकनीकी सदस्य होंगे। इससे इस क्षेत्र में जीएसटी से संबंधित मामलों का निपटान तेजी से हो सकेगा। जीएसटी ट्रिब्यूनल की स्थापना से व्यापारियों और व्यवसायों को जीएसटी से संबंधित मामलों में न्याय पाने में आसानी होगी। इससे व्यापार करने में भी सुविधा होगी। यदि कोई व्यक्ति या व्यवसाय जीएसटी से संबंधित किसी आदेश से संतुष्ट नहीं है, तो वह जीएसटी ट्रिब्यूनल में अपील कर सकता है। केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) अतिरिक्त आयुक्त अमित भास्कर ने बताया कि हिमाचल में जीएसटी ट्रिब्यूनल की स्थापना को लेकर शोघी में बीएसएनएल के भवन का चयन किया गया है। लीज एग्रीमेंट का प्रस्ताव बीसीएनएल को भेजा है। प्रदेश सरकार से मंजूरी मिलने के बाद भवन को ट्रिब्यूनल के नियमों के तहत मोडिफाई किया जाएगा।
जीएसटी ट्रिब्यूनल एक अपीलीय न्यायाधिकरण है, जो वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से संबंधित मामलों की सुनवाई करता है। सेवानिवृत्त न्यायाधीश ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष होते हैं। अप्रैल 2025 में प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य वस्तु एवं सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण में तकनीकी सदस्य के रिक्त पद को भरने के संबंध में 13 नवंबर 2024 के संशोधन को दी गई चुनौती को खारिज कर दिया था। अदालत के फैसले के बाद जीएसटी ट्रिब्यूनल के गठन में तकनीकी सदस्य की चयन प्रक्रिया पर लगी रोक भी बहाल हो गई थी। इसके तहत हिमाचल के राज्य कर और आबकारी विभाग के वे अधिकारी राज्य पीठ में तकनीकी सदस्य के रूप में नियुक्ति के लिए पात्र होंगे, जिन्होंने राजपत्रित अधिकारी के रूप में 25 वर्ष की सेवा दी है। इससे पहले केवल आईएएस ही इसके लिए पात्र थे। इसके अलावा जीएसटी ट्रिब्यूनल के गठन से कर से संबंधित मामले सीधे तौर पर हाईकोर्ट में दायर नहीं कर पाएंगे।
