सोलन। हिमाचल प्रदेश के सोलन स्थित डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी में आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। प्रदेश सरकार से समय पर पर्याप्त वित्तीय सहायता नहीं मिलने और कर्मचारियों के वेतन व पेंशन का बढ़ता बोझ विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। हालात को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने मुख्य परिसर सहित प्रदेशभर में संचालित सभी केंद्रों में गैर-जरूरी खर्चों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इसके साथ ही प्रशासन की ओर से संचालित वित्त पोषित योजनाओं को भी स्थगित कर दिया गया है।

30 अक्तूबर को जारी हुआ आदेश

विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस संबंध में 30 अक्तूबर को अधिसूचना जारी की गई है। इसके तहत सभी विभागाध्यक्षों, डीन, निदेशकों, कार्यालय प्रमुखों और बाहरी केंद्रों व कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के अनुसंधान सह-निदेशकों को निर्देश दिए गए हैं कि उपलब्ध वित्तीय संसाधनों का इस्तेमाल करने से पहले सक्षम प्राधिकारी से अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

आदेश के अनुसार कार्यालय के आकस्मिक खर्च, सामान और उपकरणों की खरीद, उपभोग्य वस्तुओं, मरम्मत और रखरखाव सहित अन्य गैर-जरूरी खर्चों में तत्काल कटौती की जाएगी। अब खर्च केवल बेहद जरूरी परिचालन आवश्यकताओं के लिए ही किया जा सकेगा। अधिकारियों की पूर्व अनुमति के बिना गैर-जरूरी मदों पर कोई खर्च नहीं होगा।

सरकारी फंड में करीब आठ प्रतिशत की कटौती

विश्वविद्यालय की आर्थिक स्थिति बिगड़ने के पीछे राज्य सरकार से पर्याप्त वित्तीय सहायता नहीं मिलना भी एक प्रमुख कारण बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार जुलाई में सरकार ने विश्वविद्यालय को मिलने वाले 121 करोड़ रुपये के फंड में करीब आठ प्रतिशत की कटौती की थी। इसके अलावा ग्रांट-इन-एड भी नहीं मिल पाई है।

उपलब्ध राशि से कर्मचारियों के मासिक वेतन और पेंशन का समय पर भुगतान सुनिश्चित करना भी मुश्किल हो रहा है। इससे पहले विश्वविद्यालय प्रशासन ने फीस में बढ़ोतरी की थी, लेकिन विरोध के बाद इसे कम कर दिया गया था।

कई जिलों में संचालित हैं विश्वविद्यालय के केंद्र

नौणी विश्वविद्यालय के अंतर्गत सोलन, शिमला, किन्नौर, लाहौल-स्पीति और हमीरपुर सहित प्रदेश के कई जिलों में कॉलेज और कृषि विज्ञान केंद्र संचालित हो रहे हैं। ऐसे में खर्चों में कटौती और वित्त पोषित योजनाओं को स्थगित करने के फैसले का असर विश्वविद्यालय की विभिन्न गतिविधियों पर पड़ सकता है।

खर्चों पर नियंत्रण की जिम्मेदारी अधिकारियों की

विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सभी विभागाध्यक्ष, डीन, निदेशक, कार्यालय प्रमुख और संबंधित अधिकारी इन निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करेंगे। अपने प्रशासनिक नियंत्रण में होने वाले अनावश्यक और अनधिकृत खर्चों को रोकने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी। आदेश में किसी भी तरह के बदलाव या छूट के लिए सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य किया गया है।

कुलपति ने बताई आर्थिक स्थिति

नौणी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हरमिंदर सिंह बवेजा के अनुसार विश्वविद्यालय के सामने वेतन और पेंशन सहित नियमित वित्तीय दायित्वों के अलावा लंबित देनदारियों तथा न्यायालयों के निर्देशों के अनुपालन से जुड़े अतिरिक्त वित्तीय दायित्व भी हैं। इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अनावश्यक खर्चों में कटौती का निर्णय लिया गया है।

अब देखना होगा कि विश्वविद्यालय को सरकार की ओर से अतिरिक्त वित्तीय सहायता कब तक मिलती है और आर्थिक संकट के बीच शैक्षणिक, अनुसंधान एवं अन्य गतिविधियों को किस तरह सुचारू रखा जाता है।