
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में लावारिस कुत्तों के हमलों ने दहशत मचा दी है। बुधवार को एक ही दिन में कुत्तों ने शहर में 11 लोगों को काट लिया। इंदिरा गांधी कॉलेज (आईजीएमसी) में बुधवार शाम 4:00 बजे तक छह और डीडीयू में पांच लोग उपचार के लिए पहुंचे। इनमें दो लोगों को कुत्तों ने बुरी तरह काटा है। शहर के ताराहॉल स्कूल में शिक्षक के पद पर कार्यरत सुरेश लखनपाल अपनी बेटी को लेकर स्कूल की ओर जा रहे थे। सुबह करीब 7:25 बजे जैसे ही कार्टरोड पर सब्जी मंडी सड़क के पास पहुंचे तो अचानक तीन चार कुत्तों ने उनकी बेटी पर हमला कर दिया।
लखनपाल ने बेटी को तो बचा लिया लेकिन कुत्तों ने इनकी बाईं टांग पर गहरे घाव कर दिए। मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने डंडों और पत्थर लेकर कुत्तों को यहां से भगाया। इसके बाद लखनपाल डीडीयू अस्पताल पहुंचे। डॉक्टरों के अनुसार कुत्तों के काटने से इनके दांत टांग में हड्डी तक पहुंच गए थे। फिलहाल इन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया है। बीसीएस में विधानसभा में तैनात कर्मचारी उमेश शर्मा पर सुबह 9:00 बजे लावारिस कुत्तों ने हमला कर दिया। इनकी टांगों पर भी कुत्तों के काटने से गहरे घाव पड़े हैं। वार्ड पार्षद आशा शर्मा ने कहा कि दो दिन पहले भी इन कुत्तों ने दो बच्चों को काटा था। नगर निगम इन्हें पकड़े ताकि लोगों को बचाया जा सके। अन्य मामले शहर के पंथाघाटी, मैहली, टुटू आदि क्षेत्रों से आए हैं।
कुत्तों के हमले से जख्मी हुए शिक्षक सुरेश लखनपाल ने कहा कि शहर में रोज कुत्ते लोगों को लहूलुहान कर रहे हैं। आखिर कब तक यह सिलसिला चलेगा। कहा कि तो डॉग लवर या मेनका गांधी ऐसे लोगों को मुआवजा दें या फिर इन्हें शेल्टर देना बंद करें। कहा कि ये लोग बाकी जानवरों को मारने पर तो मौन रहते हैं लेकिन लावारिस कुत्तों को अगर पकड़ने की बात भी आए तो पशुप्रेमी बन जाते हैं। कहा कि इस बारे जल्द कोर्ट में भी याचिका दायर करेंगे। शिक्षक ने निगम पार्षदों को भी शिकायत दी। कहा कि नगर निगम जनता के टैक्स के पैसों से सैर सपाटे कर रहा है लेकिन कुत्तों से राहत दिलाने के लिए कोई काम नहीं कर रहा।
