
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मृतक कर्मचारी की पारिवारिक पेंशन स्वैच्छिक समझौते के आधार पर पहली और दूसरी पत्नी के बीच समान रूप से साझा की जा सकती है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने मध्यस्थता के दौरान दोनों पत्नियों ने स्वेच्छा से अपने बयान दर्ज कराए, जिसमें उन्होंने पारिवारिक पेंशन के 50-50 फीसदी बंटवारे पर सहमति व्यक्त की। अदालत ने माना कि दोनों बयान किसी भय, दबाव या धोखाधड़ी के तहत नहीं दिए गए। खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश की ओर से पारित आदेश को रद्द कर दिया और कहा कि राज्य सरकार पेंशन संबंधी औपचारिकताएं चार सप्ताह में पूरी करे। अदालत ने यह फैसला कमला देवी बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य एवं अन्य में दिया।
अपीलकर्ता कमला देवी के पति सोहन लाल पुलिस विभाग में सहायक उप निरीक्षक थे। 1970 में दोनों का विवाह हुआ और 1976 में एक बेटी का जन्म हुआ। बाद में पति-पत्नी अलग हो गए और सोहन लाल ने 1979 में दूसरी शादी गायत्री देवी से की, जिनसे चार संतानें हुईं। सोहन लाल का निधन 2023 में हो गया। उनके सेवा अभिलेखों में दूसरी पत्नी का नाम दर्ज होने के कारण महालेखाकार ने पेंशन लाभ गायत्री देवी के पक्ष में जारी कर दिए। इस पर पहली पत्नी कमला देवी ने दावा किया कि वह कानूनी रूप से वैध पत्नी हैं और उन्हें भी पेंशन का हक है। उनकी याचिका को 15 जुलाई 2024 को एकल न्यायाधीश ने खारिज कर दिया था। इसके खिलाफ डबल बैंच में अपील दायर हुई। अपील लंबित रहने के दौरान दोनों पत्नियों ने विवाद को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाने की इच्छा जताई और रजिस्ट्रार (न्यायिक) के समक्ष बयान दर्ज कराए। उन्होंने पेंशन को समान रूप से बांटने पर सहमति जताई। खंडपीठ ने इस समझौते को वैध ठहराते हुए राज्य सरकार को आदेश दिया कि पेंशन में संशोधन कर दोनों पत्नियों के बीच बराबर बांटा जाए। अदालत ने कहा कि स्वैच्छिक समझौता न्यायसंगत है और इसे लागू किया जाना चाहिए।
