हिमाचल प्रदेश में नए जिलों के गठन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। जिला पुनर्गठन आयोग के गठन के बाद कांगड़ा जिले के देहरा को नया जिला बनाने की मांग ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। खास बात यह है कि देहरा में पुलिस जिला, क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) और कई विभागों के सर्किल कार्यालय पहले से मौजूद हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि इस बार उनकी वर्षों पुरानी मांग पर गंभीरता से विचार हो सकता है।

देहरा के पक्ष में पहले से मौजूद है प्रशासनिक ढांचा

देहरा को जिला बनाने की मांग के पीछे यहां मौजूद प्रशासनिक सुविधाओं को प्रमुख आधार माना जा रहा है। क्षेत्र में लोक निर्माण विभाग, जल शक्ति विभाग और बिजली बोर्ड के सर्किल कार्यालयों के अलावा आरटीओ, जीएसटी सर्कल कार्यालय और पुलिस जिला भी स्थापित हैं। इसके अतिरिक्त डाडासीबा में एसडीएम कार्यालय खोलने की घोषणा की गई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इन कार्यालयों की मौजूदगी से नए जिले के संचालन के लिए जरूरी प्रशासनिक ढांचे का एक बड़ा हिस्सा पहले से उपलब्ध है। हालांकि, नया जिला बनाने के लिए अतिरिक्त अधिकारियों, कर्मचारियों, कार्यालयों और संसाधनों की जरूरत का आकलन भी करना होगा।

धर्मशाला से 60 से 100 किलोमीटर की दूरी बड़ी वजह

कांगड़ा हिमाचल प्रदेश का सबसे बड़ा जिला है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, जिले की आबादी करीब 15 लाख और क्षेत्रफल 5,739 वर्ग किलोमीटर है। जिले के कई दूरदराज क्षेत्रों के लोगों को सरकारी कामकाज के लिए धर्मशाला स्थित जिला मुख्यालय तक जाना पड़ता है।

देहरा, ज्वालामुखी और जसवां-परागपुर विधानसभा क्षेत्रों के कई हिस्सों से धर्मशाला की दूरी लगभग 60 से 100 किलोमीटर तक बताई जाती है। ऐसे में देहरा को जिला बनाने से लोगों को प्रशासनिक सेवाएं नजदीक मिलने की उम्मीद है। इससे यात्रा में लगने वाले समय और खर्च में भी कमी आ सकती है।

किन क्षेत्रों को नए जिले में किया जा सकता है शामिल?

संभावित देहरा जिले में देहरा, ज्वालामुखी और जसवां-परागपुर विधानसभा क्षेत्रों को शामिल किए जाने की चर्चा है। वहीं, जवाली विधानसभा क्षेत्र को भी संभावित दायरे में शामिल करने का विकल्प विचारणीय बताया जा रहा है।

हालांकि, अभी तक इन क्षेत्रों को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। नए जिले की सीमाएं क्या होंगी और किन क्षेत्रों को इसमें शामिल किया जाएगा, यह जिला पुनर्गठन आयोग की सिफारिशों और सरकार के फैसले पर निर्भर करेगा।

कई उपतहसीलें और बड़ी आबादी का क्षेत्र

देहरा, ज्वालामुखी और जसवां-परागपुर विधानसभा क्षेत्रों के अंतर्गत देहरा, हरिपुर, जसवां कोटला, डाडासीबा, रक्कड़, परागपुर और खुंडियां के अलावा मझीन और लगड़ू जैसी उपतहसीलें आती हैं।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, देहरा विधानसभा क्षेत्र में करीब 85,263, ज्वालामुखी में 80,141 और जसवां-परागपुर में 80,533 मतदाता हैं। क्षेत्र का विस्तृत भौगोलिक दायरा और लोगों की प्रशासनिक जरूरतें देहरा को जिला बनाने की मांग के प्रमुख आधार माने जा रहे हैं।

स्थानीय लोगों ने बताई जिला बनाने की जरूरत

समाजसेवी पवन बजरंगी का कहना है कि देहरा को जिला बनाने की मांग लंबे समय से उठ रही है। जिला बनने से लोगों को प्रशासनिक कार्यों के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा और उनके समय व पैसे की बचत होगी।

व्यवसायी सुधीर शर्मा के अनुसार, देहरा, ज्वालामुखी और जसवां-परागपुर क्षेत्रों को एक जिला व्यवस्था में शामिल करने से विकास कार्यों में तेजी आ सकती है। इससे सरकारी कार्यालयों के विस्तार और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की भी उम्मीद है।

देहरा निवासी नवीन वैद का कहना है कि क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों और लोगों की जरूरतों को देखते हुए इस मांग पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। वहीं, बढ़ल निवासी संपत कुमार को उम्मीद है कि आयोग और सरकार जनसंख्या, प्रशासनिक जरूरतों तथा लोगों की सुविधा को ध्यान में रखकर निर्णय लेंगे।

अब आयोग की सिफारिशों पर टिकी निगाहें

देहरा को जिला बनाने की मांग के पक्ष में प्रशासनिक ढांचे की उपलब्धता, धर्मशाला से दूरी और क्षेत्रीय विकास जैसे तर्क दिए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि जिला पुनर्गठन आयोग इन सभी पहलुओं पर विचार करेगा।

हालांकि, अभी देहरा को नया जिला बनाने या उसकी सीमाएं तय करने के संबंध में कोई अंतिम सरकारी घोषणा नहीं हुई है। अब देखना होगा कि आयोग की सिफारिशों और सरकार के फैसले के बाद देहरा की वर्षों पुरानी मांग को लेकर क्या तस्वीर सामने आती है।