हिमाचल प्रदेश की स्कूली शिक्षा को लेकर एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की यू-डाइस प्लस 2025-26 रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में स्कूलों की संख्या तो पर्याप्त है, लेकिन उनमें पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या लगातार घट रही है।रिपोर्ट के मुताबिक, जहां देशभर में एक स्कूल में औसतन 169 छात्र पढ़ते हैं, वहीं हिमाचल में यह आंकड़ा सिर्फ 72 छात्रों का है। प्रदेश के करीब 49 प्रतिशत स्कूलों में 30 से भी कम विद्यार्थी पढ़ रहे हैं, जबकि 13.3 प्रतिशत स्कूलों में 10 से भी कम छात्र नामांकित हैं।

रिपोर्ट में घटती जन्मदर, ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन, छोटे परिवारों का बढ़ता चलन और निजी स्कूलों की ओर बढ़ते रुझान को इसकी प्रमुख वजह बताया गया है। हालांकि, शिक्षा के बुनियादी ढांचे के मामले में हिमाचल देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। प्रदेश के हजारों स्कूल कंप्यूटर और इंटरनेट जैसी सुविधाओं से लैस हैं तथा शिक्षक-छात्र अनुपात भी राष्ट्रीय औसत से काफी बेहतर है।

रिपोर्ट का एक सकारात्मक पहलू यह भी है कि हिमाचल में शून्य नामांकन वाला एक भी स्कूल नहीं है। इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि अब सबसे बड़ी चुनौती नए स्कूल खोलना नहीं, बल्कि खाली होती कक्षाओं के बीच शिक्षा संसाधनों का बेहतर उपयोग करना है।