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शिमला। हिमाचल प्रदेश में आसान और तुरंत लोन देने का लालच युवाओं के लिए मुसीबत बनता जा रहा है। पांच मिनट में बिना दस्तावेज ऋण देने का दावा करने वाले फर्जी मोबाइल एप के जरिए लोगों को अपने जाल में फंसाया जा रहा है। आरोप है कि कुछ एप के माध्यम से छोटी रकम का लोन देने के बाद लोगों को ब्लैकमेल किया जाता है और उनकी निजी तस्वीरों व संपर्क सूची का दुरुपयोग करने की धमकियां दी जाती हैं।

एक महीने में साइबर क्राइम सेल को मिलीं आठ शिकायतें

शिमला साइबर क्राइम सेल को पिछले एक महीने में फर्जी लोन एप से संबंधित आठ शिकायतें मिली हैं। इनमें शिमला सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों के युवा शामिल हैं। कॉलेज और विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थी भी इन ठगों के निशाने पर हैं।

शिकायतकर्ताओं के अनुसार, सोशल मीडिया पर तुरंत लोन देने वाले एप के विज्ञापन देखकर उन्होंने आवेदन किया था। कम औपचारिकताओं में पैसे मिलने की उम्मीद में एप डाउनलोड करने के बाद उन्हें कथित तौर पर परेशान किया जाने लगा। कुछ मामलों में लोन की रकम चुकाने के बाद भी प्रताड़ना जारी रहने की शिकायत मिली है।

फोन की फोटो गैलरी और कॉन्टैक्ट लिस्ट तक पहुंच

फर्जी लोन एप का सबसे चिंताजनक पहलू मोबाइल में मौजूद निजी जानकारियों का दुरुपयोग है। कुछ एप इंस्टॉल करते समय उपयोगकर्ताओं से फोटो गैलरी, संपर्क सूची, कैमरा और अन्य सुविधाओं की अनुमति मांगी जाती है। अनावश्यक अनुमतियां देने पर निजी तस्वीरों और संपर्कों तक पहुंच का खतरा बढ़ सकता है।

शिकायतों के अनुसार, कथित ठग भुगतान में देरी होने पर पीड़ितों को उनके परिचितों से संपर्क करने की धमकी देते हैं। कुछ मामलों में तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ कर उन्हें बदनाम करने की धमकी देने की बात भी सामने आई है। इसके अलावा, उधार ली गई रकम से कई गुना अधिक पैसे मांगने की शिकायतें भी मिली हैं।

पुलिस ने युवाओं से की सतर्क रहने की अपील

एसपी शिमला साइबर क्राइम अमित यादव ने युवाओं को फर्जी लोन एप से सावधान रहने की अपील की है। उन्होंने बताया कि इस तरह की शिकायतें मिली हैं और पुलिस मामलों की जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति इस तरह की साइबर ठगी का शिकार होता है तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करे।

पुलिस ने पीड़ितों को सलाह दी है कि वे ठगी से जुड़े बैंक विवरण, भुगतान के स्क्रीनशॉट, फोन नंबर, संदेश और एप की जानकारी सुरक्षित रखें। ये डिजिटल साक्ष्य जांच में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

सोशल मीडिया पर दिखने वाले हर लोन विज्ञापन पर न करें भरोसा

फर्जी लोन एप के विज्ञापन सोशल मीडिया, एसएमएस और व्हाट्सएप संदेशों के जरिए लोगों तक पहुंच सकते हैं। इनमें बिना दस्तावेज लोन, तुरंत मंजूरी और पांच मिनट में पैसे मिलने जैसे आकर्षक दावे किए जाते हैं। कई बार लोग इन दावों पर भरोसा करके अपनी संवेदनशील जानकारी साझा कर देते हैं।

लोन लेने से पहले संबंधित कंपनी की विश्वसनीयता और यह जांचना जरूरी है कि वह किसी भारतीय रिजर्व बैंक से विनियमित बैंक या गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी से जुड़ी है या नहीं। अनजान लिंक से एप डाउनलोड करने और फोटो गैलरी व संपर्क सूची जैसी अनावश्यक अनुमतियां देने से बचना चाहिए।

वित्तीय कॉल की पहचान के लिए 1600 और 140 नंबर शृंखला

वित्तीय सेवाओं से संबंधित वास्तविक सेवा कॉल की पहचान आसान बनाने के लिए 1600 नंबर शृंखला का उपयोग किया जाता है, जबकि वित्तीय उत्पादों से जुड़ी प्रचार और विपणन कॉल के लिए 140 नंबर शृंखला निर्धारित है। हालांकि, केवल फोन नंबर देखकर किसी कॉल को पूरी तरह सुरक्षित नहीं मानना चाहिए। किसी भी व्यक्ति के साथ ओटीपी, पासवर्ड या अन्य गोपनीय बैंकिंग जानकारी साझा करने से पहले संबंधित संस्थान के आधिकारिक माध्यम से पुष्टि जरूर करें।

फर्जी लोन एप के जरिए होने वाली ठगी से बचने के लिए सतर्कता बेहद जरूरी है। जल्द पैसे मिलने के लालच में अपनी निजी तस्वीरों, संपर्कों और बैंकिंग जानकारी को जोखिम में न डालें।