हिमाचल प्रदेश में सत्र 2026-27 से 26 सरकारी महाविद्यालयों में चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम शुरू होगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के तहत यह व्यवस्था लागू की जा रही है। हालांकि, इन संस्थानों के सभी विषय नए ढांचे में शामिल नहीं किए गए हैं। कई महाविद्यालयों में बड़ी संख्या में विषय अभी भी तीन वर्षीय डिग्री प्रणाली के तहत संचालित होंगे। इससे प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को संस्थान के साथ पसंदीदा विषय की उपलब्धता की पड़ताल करनी होगी। राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला में 29 में से आठ विषय चार वर्षीय कार्यक्रम में नहीं हैं। वल्लभ राजकीय महाविद्यालय मंडी में 28 में से नौ विषय तीन वर्षीय रहेंगे।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस स्मारक महाविद्यालय हमीरपुर में 27 में से 10 विषय पुरानी व्यवस्था में हैं। राजकीय कन्या महाविद्यालय शिमला में 28 में से 18 विषय तीन वर्षीय डिग्री के रूप में पढ़ाए जाएंगे। महाराणा प्रताप राजकीय महाविद्यालय अंब और राजकीय आर्य महाविद्यालय नूरपुर में 20 में से 13-13 विषय तीन वर्षीय रहेंगे। उच्च शिक्षा विभाग निदेशक हरीश कंवर ने बताया कि शोध सुविधाओं की कमी के कारण कई विषय बाहर हैं। भविष्य में संसाधन बढ़ने पर अन्य विषयों को भी नए ढांचे में जोड़ा जा सकता है। छात्रों को प्रवेश आवेदन भरने से पहले महाविद्यालय से विषयवार स्थिति की पुष्टि करनी चाहिए। 

चार वर्षीय कार्यक्रम के लिए विज्ञान, वाणिज्य और पारंपरिक कला विषयों को अधिक प्राथमिकता मिली है। इनमें अंग्रेजी, गणित, भौतिकी, रसायन विज्ञान, वनस्पति विज्ञान और प्राणी विज्ञान शामिल हैं। अर्थशास्त्र, इतिहास, राजनीति विज्ञान, भूगोल, हिंदी और वाणिज्य भी मुख्य धुरी बने हैं। समाजशास्त्र, संस्कृत, संगीत और शारीरिक शिक्षा को भी कई संस्थानों में स्थान मिला है।

बाहर रखे गए विषय

कौशल आधारित, व्यावसायिक और विशेष प्रकृति के कई पाठ्यक्रम अभी चार वर्षीय कार्यक्रम से बाहर हैं। इनमें पत्रकारिता एवं जनसंचार, पर्यटन एवं यात्रा प्रबंधन और कंप्यूटर एप्लीकेशन शामिल हैं। पेंटिंग, एप्लाइड आर्ट्स, गृह विज्ञान, नृत्य, शिक्षा, दर्शनशास्त्र, मनोविज्ञान और मानवशास्त्र भी तीन वर्षीय व्यवस्था में हैं। शिक्षा विभाग के अनुसार, विषय चयन का आधार शोध क्षमता है, केवल मांग नहीं।