शिमला। रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) अब सिर्फ रेलवे पटरियां बिछाने तक सीमित नहीं रहेगा। रेलवे परियोजनाओं में बड़े काम के बाद अब कंपनी ने हाईवे, एक्सप्रेसवे, पोर्ट, मेट्रो, सुरंग, एयरपोर्ट भवन और सौर ऊर्जा जैसे कई बड़े बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में कदम बढ़ाने की तैयारी की है।


रेल मंत्रालय के अधीन नवरत्न कंपनी आरवीएनएल ने देश-विदेश की आगामी बड़ी परियोजनाओं के लिए भारतीय कंपनियों से साझेदारी के प्रस्ताव मांगे हैं। कंपनी इन नए क्षेत्रों में संयुक्त उद्यम और कंसोर्टियम के जरिए प्रवेश करेगी।


किन क्षेत्रों में होगा विस्तार?
आरवीएनएल अपनी तकनीकी क्षमता और परियोजना प्रबंधन के अनुभव का इस्तेमाल अब रेलवे से बाहर भी करेगी। कंपनी की नजर एक्सप्रेसवे, बड़े पुल, पोर्ट, समुद्री कार्य, सिंचाई नहर, मेट्रो, सुरंग, रेलवे विद्युतीकरण, सौर ऊर्जा और पावर ट्रांसमिशन जैसी परियोजनाओं पर है।


कंपनी करीब 500 करोड़ रुपये से लेकर 1000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य वाली परियोजनाओं के लिए साझेदार तलाश रही है।
साझेदारी के लिए क्या होगी शर्त?
आरवीएनएल ने साझेदारी करने वाली कंपनियों के लिए कई पात्रता शर्तें तय की हैं। संबंधित कंपनी के पास निर्माण या तकनीकी क्षेत्र में कम से कम पांच वर्ष का अनुभव होना जरूरी है।
इसके अलावा पिछले पांच वर्षों की औसत नेटवर्थ सकारात्मक और पिछले तीन वित्तीय वर्षों का औसत कर-पूर्व लाभ भी सकारात्मक होना चाहिए। 31 मार्च 2026 तक डेट-इक्विटी अनुपात 2 से अधिक नहीं होना चाहिए। आकस्मिक देनदारियां नेटवर्थ के 2.5 गुना से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।


कंपनी किसी सरकारी विभाग, पीएसयू या विदेशी निकाय की ओर से ब्लैकलिस्ट नहीं होनी चाहिए और उसके खिलाफ एनसीएलटी में दिवालिया प्रक्रिया भी लंबित नहीं होनी चाहिए।


बड़े प्रोजेक्ट के लिए बड़ी योग्यता
मेट्रो, सुरंग और सिविल कार्यों की श्रेणी-ए में शामिल होने के लिए कंपनी के पास 500 करोड़ रुपये से अधिक के किसी एक काम का अनुभव होना चाहिए। साथ ही पांच साल का औसत टर्नओवर कम से कम 750 करोड़ रुपये होना जरूरी है।


वहीं सड़क, एक्सप्रेसवे और पोर्ट की श्रेणी-ए परियोजनाओं के लिए 1000 करोड़ रुपये से अधिक के एकल काम का अनुभव और कम से कम 1500 करोड़ रुपये का औसत टर्नओवर जरूरी होगा।
रेलवे विद्युतीकरण और सौर ऊर्जा जैसे कार्यों के लिए 100 करोड़ रुपये से अधिक के काम का अनुभव और 150 करोड़ रुपये का औसत टर्नओवर मांगा गया है।


विदेशों तक पहुंचा RVNL का विस्तार
आरवीएनएल का विस्तार सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। कंपनी मालदीव, उज्बेकिस्तान और सऊदी अरब में भी बुनियादी ढांचा और सौर ऊर्जा से जुड़ी परियोजनाओं पर काम कर रही है।
वर्ष 2003 में स्थापित आरवीएनएल ने 31 मार्च 2026 तक 17,171 किलोमीटर से अधिक रेलवे अवसंरचना का निर्माण पूरा किया है। सार्वजनिक उद्यम विभाग की ओर से कंपनी को लगातार 14वें वर्ष ‘उत्कृष्ट’ रेटिंग भी दी गई है।


स्थानीय रोजगार को भी मिलेगा फायदा
आरवीएनएल के इस विस्तार का असर रोजगार पर भी पड़ सकता है। जिन क्षेत्रों में निगम किसी कंपनी के साथ साझेदारी करेगा, वहां परियोजनाओं के छोटे-छोटे काम स्थानीय ठेकेदारों को मिलने की संभावना रहेगी। इससे कुशल और अकुशल दोनों तरह के स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।
हालांकि साझेदारी के लिए आवेदन करने वाली कंपनियों के पास निर्माण या तकनीकी क्षेत्र में कम से कम पांच वर्ष का अनुभव होना अनिवार्य रखा गया है।


आरवीएनएल ने यह भी स्पष्ट किया है कि 2 दिसंबर 2025 के EOI के तहत पहले से एम्पेनल एजेंसियों को उन्हीं क्षेत्रों के लिए दोबारा आवेदन नहीं करना होगा। लेकिन जो एजेंसियां नई श्रेणी या नए क्षेत्र में शामिल होना चाहती हैं, वे इस प्रक्रिया में आवेदन कर सकती हैं।