शिमला। हिमाचल प्रदेश की पंचायतों में लंबे समय से रुके विकास कार्यों को अब रफ्तार मिलने की उम्मीद है। 16वें वित्त आयोग की पहली किस्त जारी होने का रास्ता साफ हो गया है। केंद्र सरकार ने पुरानी राशि के उपयोग को लेकर हिमाचल की किस्त रोक दी थी, लेकिन अब राज्य सरकार ने जरूरी प्रक्रिया पूरी कर दी है।


पंचायतीराज विभाग की ओर से केंद्रीय मंत्रालय को उपयोगिता प्रमाणपत्र (Utilization Certificate) जमा करा दिया गया है। इसके बाद अब केंद्र की ओर से पंचायतों के लिए 16वें वित्त आयोग की पहली किस्त जारी किए जाने की उम्मीद है।


क्यों अटकी थी पंचायतों की किस्त?
केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाली पिछली वित्तीय सहायता की राशि का पूरी तरह उपयोग नहीं किए जाने को लेकर हिमाचल की अगली किस्त रोक दी गई थी। अब प्रदेश ने 14वें वित्त आयोग की राशि विकास कार्यों में खर्च कर ली है और इसका उपयोगिता प्रमाणपत्र केंद्र को सौंप दिया गया है।


इसके साथ ही अब 16वें वित्त आयोग के तहत मिलने वाली राशि का रास्ता खुल गया है।
अगले महीने शुरू हो सकते हैं विकास कार्य
केंद्र से 16वें वित्त आयोग की पहली किस्त मिलने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे से जुड़े विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है। अगले महीने से पंचायतों में विभिन्न विकास कार्य तेजी से शुरू किए जा सकते हैं।


राज्य सरकार की ओर से केंद्र की गाइडलाइन के अनुसार विकास कार्यों के प्लान भी तैयार किए जा रहे हैं। इन योजनाओं को निर्धारित समयसीमा के भीतर केंद्र सरकार को भेजना होगा।


खर्च पर रहेगी केंद्र की नजर
16वें वित्त आयोग की राशि जारी होने के बाद पंचायतों में होने वाले विकास कार्यों और धनराशि के इस्तेमाल पर केंद्र सरकार की निगरानी रहेगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जारी पैसा निर्धारित योजनाओं और विकास कार्यों के लिए ही इस्तेमाल हो।
धनराशि के दुरुपयोग या किसी भी तरह की अनियमितता को रोकने के लिए निगरानी और जवाबदेही की व्यवस्था पर भी जोर दिया जा रहा है।


पंचायतों में बढ़ेगी विकास की रफ्तार
16वें वित्त आयोग की पहली किस्त मिलने से ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, नालियों, पेयजल, सामुदायिक सुविधाओं और अन्य बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
सरकार की कोशिश है कि केंद्र से मिलने वाली राशि का सही और पारदर्शी तरीके से इस्तेमाल हो, ताकि इसका सीधा लाभ ग्रामीण क्षेत्रों और पंचायतों के विकास तक पहुंच सके।