पहाड़ों की ताजी हवा का सपना अब बद्दी के औद्योगिक गलियारों में दम तोड़ रहा है। साल 2025 के विदा होते-होते इस औद्योगिक क्षेत्र की फिजां इतनी जहरीली हो गई कि इसने देश के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में अपनी जगह बना ली। स्थिति यह है कि यहाँ के बाशिंदों के लिए सांस लेना किसी चुनौती से कम नहीं रहा।

दिसंबर का ‘काला’ रिपोर्ट कार्ड

बीते महीने बद्दी की आबोहवा ने स्वास्थ्य के तमाम मानकों को दरकिनार कर दिया। आंकड़ों पर नजर डालें तो महीने के 31 दिनों में से 16 दिन हवा ‘बेहद खराब’ (Very Poor) श्रेणी में दर्ज की गई। 11 दिन स्थिति ‘खराब’ रही और महज 3 दिन ही वायु गुणवत्ता ‘सामान्य’ स्तर पर टिक सकी।
बुधवार के आंकड़े चौंकाने वाले थे, जब बद्दी का एक्यूआई (AQI) 324 तक जा पहुँचा। इसके साथ ही यह शहर देश के उन 12 सबसे प्रदूषित स्थानों में शुमार हो गया, जहाँ की हवा सेहत के लिए खतरनाक मानी जाती है।

प्रमुख शहरों से तुलना (बुधवार का प्रदूषण स्तर):

नोएडा व ग्रेटर नोएडा: 398 और 388 (गंभीर स्थिति)

दिल्ली: 382

बद्दी व कटक: 324

मेरठ: 321

पंचकूला: 303

प्रदूषण के ‘विलेन’: आखिर क्यों बिगड़े हालात?
पर्यावरण के क्षेत्र में सक्रिय संस्था ‘हिम परिवेश’ के अनुसार, इस संकट के पीछे केवल मौसम ही नहीं, बल्कि मानवीय कारण भी जिम्मेदार हैं। संस्था के प्रमुख लक्ष्मी चंद ठाकुर ने इस भयावह स्थिति के लिए कुछ मुख्य बिंदुओं को चिन्हित किया है: