
सॉफ्ट ड्रिंक, एनर्जी ड्रिंक, टॉफी, चॉकलेट और अन्य मीठे खाद्य पदार्थों का लगातार सेवन हिमाचल प्रदेश के बच्चों के दांतों के लिए चिंता का कारण बन रहा है। दंत कॉलेज एवं अस्पताल शिमला के सार्वजनिक स्वास्थ्य दंत चिकित्सा विभाग के अध्ययन में 12 से 15 वर्ष की उम्र के 37.1 फीसदी बच्चों में दांतों में कैविटी यानी सड़न के लक्षण पाए गए हैं। अध्ययन में खान-पान में कार्बोहाइड्रेट और मीठे पदार्थों की अधिकता को बच्चों के दंत स्वास्थ्य के लिए अहम चिंता के रूप में सामने रखा गया है।
अध्ययन में यह भी सामने आया कि बड़ी संख्या में बच्चे दांतों की नियमित और सही तरीके से सफाई नहीं कर रहे हैं। स्कूलों और अस्पताल में आने वाले बच्चों से मिली जानकारी के अनुसार 57.2 फीसदी बच्चे दिन में केवल एक बार ब्रश करते हैं। अध्ययन में लड़कियों के दिन में एक बार ब्रश करने का अनुपात लड़कों की तुलना में अधिक पाया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि दांतों की सफाई में लापरवाही और मीठे पदार्थों के बार-बार सेवन से कैविटी के साथ मसूड़ों से जुड़ी समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है।
यह अध्ययन दंत कॉलेज एवं अस्पताल शिमला के सार्वजनिक स्वास्थ्य दंत चिकित्सा विभाग ने मई 2024 से दिसंबर 2025 के बीच किया। इसमें अस्पताल में आने वाले और विभिन्न स्कूलों में पढ़ने वाले 12 से 15 वर्ष के बच्चों को शामिल किया गया। बच्चों के 24 घंटे के खान-पान और दंत स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न पहलुओं का आकलन किया गया। अध्ययन में डॉ. नीतिका नारियाल, डॉ. विनय भारद्वाज, डॉ. शैली फोतेदार, डॉ. अरुण सिंह ठाकुर, डॉ. शैलजा वशिष्ठ और डॉ. अतुल सांख्यान शामिल रहे। अध्ययन के निष्कर्ष जून में जर्नल ऑफ इंडियन एसोसिएशन ऑफ पब्लिक हेल्थ डेंटिस्ट में प्रकाशित हुए।
अध्ययन के दौरान बच्चों के वजन से जुड़े आंकड़े भी सामने आए। इसमें 50.2 फीसदी बच्चे अंडरवेट पाए गए। हालांकि अध्ययनकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि अंडरवेट होने का दांतों में कैविटी से सीधा संबंध नहीं माना गया है। अध्ययन में 37.9 फीसदी बच्चे सामान्य वजन के थे, जबकि 6.6 फीसदी बच्चे अत्यधिक वजन और 5.3 फीसदी मोटापे की श्रेणी में पाए गए। अभिभावकों को बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जरूरत के अनुसार जांच करवाने की सलाह दी गई है।
