
हिमाचल प्रदेश में नशे के खिलाफ अभियान के बीच कई निजी क्लीनिकों की भूमिका जांच के दायरे में है। प्रदेश में 300 से अधिक निजी क्लीनिकों, अनधिकृत स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं और झोलाछाप डॉक्टरों की जांच की गई। इनमें आधे से अधिक मरीजों की आड़ में युवाओं को अवैध तरीके से पर्ची पर प्रतिबंधित और नशे की दवाइयां लिख रहे हैं। इस रैकेट में कई केमिस्ट भी शामिल हैं। प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जांच में नियंत्रित और नशीली दवाओं के दुरुपयोग की आशंका सामने आई है। पुलिस को शक है कि ड्रग तस्करों से सांठगांठ कर युवाओं तक नशीली दवाएं पहुंचाने में ऐसे क्लीनिकों का भी हाथ है।
300 से अधिक संदिग्ध क्लीनिकों की जांच की
एसटीएफ, जिला पुलिस, स्वास्थ्य और औषधि विभाग की संयुक्त टीमों ने प्रदेशभर में 300 से अधिक संदिग्ध क्लीनिकों की जांच की है। इसमें लाइसेंस, चिकित्सक पंजीकरण और दवाओं के भंडारण की जांच हुई। खरीद-बिक्री के दस्तावेज और ओपीडी रिकॉर्ड भी खंगाले गए। चिकित्सकीय जरूरत के नाम पर दवाओं के संभावित डायवर्जन का अहम पहलू सामने आया है। पुलिस को आशंका है कि वैध उपचार के नाम पर दवाएं हासिल की जा रही हैं। फिर उन्हें नशे के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। जांच के दायरे में ट्रामाडोल, अल्प्राजोलम, बुप्रेनॉर्फिन और कोडिन युक्त दवाएं हैं। टीमें फर्जी ओपीडी रिकॉर्ड से दवाओं का स्टॉक उठाने की पड़ताल कर रही हैं। बिना वैध अनुमति दवा वितरण और रिकॉर्ड में हेरफेर की भी जांच हो रही है।
निर्धारित मात्रा से अधिक नियंत्रित दवाओं के इस्तेमाल की भी पड़ताल की जा रही है। पुलिस ने नशे की सप्लाई चेन की जांच तस्करों तक सीमित नहीं रखी है। अब नशीली दवाओं की उपलब्धता में मदद करने वाले लोगों का पता लगाया जा रहा है। उनका तस्करों, निजी क्लीनिकों और दवा सप्लाई नेटवर्क से संपर्क देखा जा रहा है। जांच एजेंसियां दवाओं की खरीद से अवैध वितरण तक की कड़ी जोड़ रही हैं। यदि मिलीभगत सामने आती है तो आपराधिक कार्रवाई होगी। नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों की भी पड़ताल की जा रही है। पुलिस और जांच एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि सभी निजी क्लीनिक या चिकित्सा सेवा प्रदाता को नशे के इस खेल में शामिल नहीं हैं। निरीक्षण का उद्देश्य नियमों के उल्लंघन, अनधिकृत चिकित्सा गतिविधियों और नियंत्रित दवाओं के संभावित दुरुपयोग की पहचान करना है।
जांच में ऐसे सबसे अधिक मामले कांगड़ा, सोलन और सिरमौर जिला में मिले हैं। किन्नौर और लाहौल-स्पीति में सबसे कम मामले सामने आए हैं। जिला पुलिस की ओर से ऐसे क्लीनिकों की पूरी पड़ताल शुरू कर दी गई है। जल्द ही इसकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर कार्रवाई शुरू की जाएगी।
पूरी सप्लाई चेन की जांच, मददगार भी नहीं बचेंगे
नशे के खिलाफ कार्रवाई अब केवल तस्करों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी सप्लाई चेन और नशे की उपलब्धता में मदद करने वाले नेटवर्क की भी जांच की जा रही है। निजी क्लीनिक या चिकित्सा व्यवस्था की आड़ में यदि कोई व्यक्ति नशीली दवाओं के अवैध कारोबार में संलिप्त पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। -अशोक तिवारी, डीजीपी हिमाचल प्रदेश
संदिग्ध क्लीनिकों में दवाओं के भंडारण और वितरण से जुड़े नियमों की जांच कर अनियमितता या नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित संस्थान के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। – जितेंद्र सांजटा, निदेशक, स्वास्थ्य सुरक्षा एवं विनियमन
