भीषण गर्मी और लू की मार झेल रहे हिमाचल प्रदेश के लोगों को जल्द ही राहत मिलने की उम्मीद है। सक्रिय हो रहे पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से, वीरवार से राज्य के मौसम में बड़ा बदलाव आने वाला है। मौसम विभाग ने 16 जून तक प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में मौसम खराब रहने का पूर्वानुमान जताया है, जिसके चलते कई जिलों में तेज बारिश, आंधी और ओलावृष्टि की संभावना है।

मौसम विभाग ने आगामी दिनों के लिए अलर्ट जारी किया है। वीरवार को कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला और सिरमौर जिलों के लिए बारिश और ओलावृष्टि का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, प्रदेश के अन्य जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। वीरवार और शुक्रवार को कई क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ गरज-चमक और ओलावृष्टि होने की आशंका है।

बुधवार को प्रदेश भर में मौसम साफ रहा और अधिकांश क्षेत्रों में तेज धूप खिली रही। मैदानी और निचले इलाकों में गर्मी ने लोगों को बेहाल कर दिया था। ऊना, कांगड़ा, बिलासपुर, हमीरपुर, सोलन, सिरमौर और मंडी जिलों में लू चलने से दिन के तापमान में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। दोपहर के समय सड़कों और बाजारों में लोगों की आवाजाही भी कम देखी गई। हालांकि, पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता से प्रदेश में बादल छाने, तेज हवाएं चलने और कई स्थानों पर वर्षा होने की संभावना है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ओलावृष्टि और कुछ इलाकों में भारी बारिश भी हो सकती है। लगातार बढ़ते तापमान से परेशान लोगों के लिए यह मौसमी बदलाव निश्चित रूप से राहत लेकर आएगा। आगामी दिनों में बारिश और बादलों के छाए रहने से अधिकतम तापमान में गिरावट आने की उम्मीद है।

मौसम में बदलाव के साथ-साथ, कुछ क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं का भी सामना करना पड़ा है। मंडी जिले में मंगलवार देर शाम आए अंधड़ के कारण जोगिंद्रनगर की नौहली पंचायत के बटधार गांव में एक बहुमंजिला मकान की छत क्षतिग्रस्त हो गई। इसके अलावा, दारट, मकरीड़ी और लडभड़ोल क्षेत्रों में बिजली के खंभे और हाई वोल्टेज तार टूटने से कई गांवों की बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। सराज विधानसभा क्षेत्र के चिऊणी में भी अंधड़ ने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला चिऊणी के मुख्य भवन की छत उड़ा दी, जिससे स्कूल भवन को भारी नुकसान पहुंचा है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता प्रदेश में आगामी कुछ दिनों तक बनी रहेगी। इससे पहाड़ी इलाकों में जहां बर्फबारी की संभावना है, वहीं निचले इलाकों में बारिश और ओलावृष्टि से तापमान में कमी आएगी। यह मौसमी बदलाव न केवल गर्मी से राहत देगा, बल्कि कृषि और पर्यटन के लिए भी अनुकूल साबित हो सकता है।