
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में बुधवार को डीपीई से प्रवक्ता बने शिक्षकों के मामले में सुनवाई हुई। सरकार ने अदालत में स्कूल डीपीई संघ की ओर से दायर निष्पादन याचिका पर आश्वासन दिया कि डीपीई से प्रवक्ता बने शिक्षकों को उच्च पदों पर पदोन्नति के लिए एकीकृत (कंसोलिडेटेड) वरिष्ठता सूची के तहत ही विचाराधीन लाया जाएगा। सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि डीपीई से प्रवक्ता बने शिक्षकों की वरिष्ठता तय कर दी गई है और उन्हें अगले उच्च पदों पर पदोन्नति के लिए प्रवक्ताओं की एकीकृत वरिष्ठता सूची के अनुसार ही योग्य माना जाएगा।
पदोन्नति के लिए पात्रता पूरी तरह से प्रवक्ता पद की वरिष्ठता पर निर्भर करेगी। चाहे वह याचिकाकर्ताओं की सूची हो या अन्य प्रवक्ताओं की संयुक्त सूची। अदालत ने महाधिवक्ता के इस बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए निष्पादन याचिका का निपटारा कर दिया। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने यह आदेश 2019 के फैसले के कार्यान्वयन की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को यह छूट भी दी कि यदि भविष्य में आदेशों के अनुपालन को लेकर उन्हें कोई शिकायत होती है, तो वे दोबारा उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
वहीं प्रदेश हाईकोर्ट ने जिला मंडी की तहसील बल्ह के मोहल (कांगड़ू) क्षेत्र में भाखड़ा ब्यास प्रबंध बोर्ड की भूमि पर अवैध कब्जे और उससे उत्पन्न भूस्खलन के खतरे को लेकर कड़ा संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की पीठ ने इस संबंध में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार सहित अन्य को नोटिस जारी किए हैं। साथ ही मंडी प्रशासन को तत्काल कार्रवाई के आदेश दिए हैं। अदालत ने मंडी के उपायुक्त को आदेश दिया है कि वह तुरंत किसी जिम्मेदार अधिकारी को तैनात करें। यह अधिकारी प्रभावित स्थल का मुआयना करेगा। भूस्खलन और अतिक्रमण की स्थिति पर अपनी निष्पक्ष रिपोर्ट अदालत में सौंपेगा। मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर को होगी। याचिका में मुख्य रूप से चिंता जताई गई है कि निजी प्रतिवादियों द्वारा बीबीएमबी की जमीन पर अवैध कब्जा किया जा रहा है। इस अतिक्रमण के कारण नहर के ऊंचे किनारों पर बार-बार भूस्खलन हो रहा है। लगातार हो रहे भूस्खलन से नहर के आसपास स्थित रिहायशी मकानों के अस्तित्व पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। स्थानीय लोगों ने इस समस्या से निपटने के लिए अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपा था, लेकिन संबंधित अधिकारियों को पूर्व में शिकायतें देने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसके चलते हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
पब्बर नदी पर पुल निर्माण में देरी, सरकार को नोटिस
प्रदेश हाईकोर्ट ने रोहडू तहसील के सीमा नामक स्थान पर पब्बर नदी पर बनने वाले पुल के निर्माण में हो रही अत्यधिक देरी का कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने इस मामले में जनहित याचिका दर्ज करते हुए राज्य सरकार सहित अन्य विभागों को नोटिस जारी किए हैं। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने सरकार को 31 अगस्त तक स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। खंडपीठ ने हाईकोर्ट को प्राप्त प्रतिवेदन के आधार पर यह संज्ञान लिया है। आवेदन में चिड़गांव उपमंडल और रोहडू मंडल के तहत आरसीडी मार्ग पर पुल निर्माण में हो रही अनिश्चितकालीन देरी तथा आसपास के क्षेत्रों के अन्य पुलों के निर्माण कार्य के लटके होने का मुद्दा उठाया गया है। अगली सुनवाई तक राज्य सरकार को इस मामले में विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश करनी होगी
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने न्यू शिमला के बीसीएस में हिमुडा की जमीन को स्कूल खोलने के उद्देश्य से दिए गए प्लॉट को निजी कोचिंग संस्थान को किराये पर दिए जाने और डमी एडमिशन के मामले को लेकर दायर जनहित याचिका पर संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी। याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि प्रतिवादी को 27 अप्रैल 2025 को स्कूल खोलने के लिए प्लॉट आवंटित किया गया था। हालांकि, आवंटन की शर्तों का उल्लंघन करते हुए इस जमीन को एक निजी कोचिंग इंस्टीट्यूट को लीज और किराये पर दे दिया गया है। इस संबंध में 3 जनवरी 2026 को संबंधित अधिकारियों को शिकायत पत्र भी सौंपा गया था, लेकिन कार्रवाई न होने पर याचिकाकर्ता को अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। याचिका में बताया गया है कि न्यू शिमला के बीसीएस स्थित सेक्टर-5 में हिमाचल प्रदेश नगर एवं ग्राम विकास प्राधिकरण (हिमुडा) की ओर से स्कूल के लिए आवंटित जमीन का व्यावसायिक दुरुपयोग किया गया है। स्थानीय पार्षद की ओर से दायर इस जनहित याचिका में फर्जीवाड़ा, अतिक्रमण, अवैध निर्माण और डमी एडमिशन के जरिये राज्य कोटे पर डाका डालने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
बता दें, 1 अप्रैल 2005 को हिमुडा ने न्यू शिमला में स्कूल खोलने के लिए विज्ञापन जारी किया था। 27 अप्रैल 2005 को उच्चतम बोलीदाता के रूप में यह जमीन उर्मिला मखैक एजुकेशन सोसायटी को आवंटित की गई। लीज की शर्त के तहत यदि भूमि का उपयोग स्कूल बनाने के अलावा किसी अन्य उद्देश्य के लिए किया जाता है, तो आवंटन रद्द कर दिया जाएगा। इसके अलावा क्लॉज 21 के तहत प्रबंध समिति में हिमुडा का एक पदेन सदस्य होना अनिवार्य था, जिसका कभी पालन नहीं किया गया। जमीन पर प्रिंस्टन स्कूल या इंटरनेशनल स्कूल चलाने के बजाय इसे निजी अकादमी के प्रोपराइटर को भारी किराये पर दे दिया गया, जहां कक्षा 11वीं और 12वीं के लिए व्यावसायिक कोचिंग चलाई जा रही है। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से मांग की है कि जमीन व बनी इमारत का कब्जा वापस लिया जाए और इसे केवल स्कूल संचालन के लिए दोबारा आवंटित किया जाए। नगर निगम शिमला को नक्शे के विपरीत बने अवैध निर्माण को ढहाने के निर्देश दिए जाएं। अवैध रूप से चल रहे कोचिंग सेंटर को तुरंत बंद कराया जाए। फर्जी हाजिरी/डमी एडमिशन कराने वाले स्कूलों की मान्यता रद्द की जाए और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो।
