
चंडीगढ़/शिमला: किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को लेकर मंगलवार को छह राज्यों के बीच महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने जा रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में होने वाले इस समझौते में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी समेत अन्य संबंधित प्रतिनिधि शामिल होंगे। परियोजना के तहत हरियाणा को सिंचाई के लिए 836.39 क्यूसेक पानी मिलने का प्रावधान है, जबकि इसके लिए हरियाणा को करीब 579 करोड़ रुपये का खर्च उठाना होगा।
हरियाणा के इंजीनियर इन चीफ वीरेंद्र सिंह के अनुसार, यह समझौता राज्य को सिंचाई के क्षेत्र में दूरगामी लाभ पहुंचाएगा।
15,624 करोड़ रुपये की है किशाऊ बांध परियोजना
किशाऊ बहुउद्देशीय बांध हिमाचल प्रदेश के सिरमौर और उत्तराखंड के देहरादून जिले की सीमा पर टोंस नदी पर प्रस्तावित है। टोंस नदी यमुना की प्रमुख सहायक नदियों में शामिल है।
परियोजना की कुल प्रस्तावित लागत करीब 15,624 करोड़ रुपये है। इसमें से 12,096 करोड़ रुपये जल घटक पर खर्च किए जाने हैं। इस राशि का 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार वहन करेगी।
हिमाचल की शर्तों पर बनी सहमति
किशाऊ बांध परियोजना को लेकर हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि राज्य बिजली उत्पादन की लागत का वित्तीय बोझ नहीं उठाएगा। जून में हुई उच्चस्तरीय बैठक में इस संबंध में सहमति बनने की बात सामने आई थी।
नई व्यवस्था के अनुसार, दिल्ली और राजस्थान हिमाचल प्रदेश के बिजली घटक की लागत में हिस्सा लेंगे। इसके बदले हिमाचल के हिस्से का पानी दिल्ली और राजस्थान को मिलेगा।
हिमाचल को मिलेगी 211 मेगावाट बिजली
परियोजना के तहत हिमाचल प्रदेश को 211 मेगावाट बिजली मिलने का प्रावधान है। इसके अलावा राज्य को करीब 600 करोड़ रुपये का वार्षिक लाभ होने का अनुमान जताया गया है।
इस व्यवस्था से हिमाचल को परियोजना की बिजली लागत का वित्तीय भार उठाए बिना बिजली और आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
हरियाणा को सिंचाई के लिए मिलेगा पानी
समझौते के बाद हरियाणा को किशाऊ बांध परियोजना से सिंचाई के लिए 836.39 क्यूसेक पानी मिलने का प्रावधान होगा। राज्य सरकार का मानना है कि इससे सिंचाई व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और कृषि क्षेत्र को लंबे समय में फायदा पहुंच सकता है।
किशाऊ बांध परियोजना जल संसाधनों के उपयोग, बिजली उत्पादन और विभिन्न राज्यों की जरूरतों से जुड़ी एक महत्वपूर्ण बहुउद्देशीय योजना है। मंगलवार को होने वाला समझौता इसके आगे के कार्यों के लिए अहम माना जा रहा है।
