
शिमला/किन्नौर: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने भारत-चीन सीमा पर बनाई जा रही सामरिक महत्व की सड़क के निर्माण कार्य में स्थानीय लोगों की ओर से कथित तौर पर बाधा डालने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने किन्नौर के उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए हैं कि वे निर्माण स्थल पर किसी भी तरह की रुकावट को रोकें और सड़क निर्माण कर रही कंपनी को सुरक्षा उपलब्ध कराएं।
न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने स्पष्ट किया है कि प्रशासन पहले स्थानीय लोगों से बातचीत कर मामले का समाधान निकालने का प्रयास करे। यदि लोग सहयोग करने से इन्कार करते हैं, तो उनके नाम और पूरे विवरण हाईकोर्ट को भेजे जाएं, ताकि उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई पर विचार किया जा सके।
आदेश का उल्लंघन हुआ तो अवमानना का मामला
हाईकोर्ट ने कहा है कि जिला प्रशासन या स्थानीय लोगों की ओर से अदालत के आदेश का उल्लंघन किए जाने पर इसे अदालत की अवमानना माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में गंभीर दंडात्मक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
इसके साथ ही राज्य सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्तूबर को होगी। अदालत ने यह आदेश बृज गोपाल कंस्ट्रक्शन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद पारित किया है।
क्या है पूरा विवाद?
जानकारी के अनुसार, बृज गोपाल कंस्ट्रक्शन कंपनी भारत-चीन सीमा पर भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के लिए अत्यधिक ऊंचाई वाली सामरिक सड़क का निर्माण कर रही है। इस परियोजना को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करना जरूरी है।
किन्नौर में निर्माण कार्य के दौरान कुछ मलबा नदी में गिर गया था, जिससे जल शक्ति विभाग का एक वाटर स्टोरेज टैंक क्षतिग्रस्त हो गया। इसके बाद स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया और सड़क निर्माण कार्य में कथित तौर पर बाधा उत्पन्न होने लगी।
कंपनी ने नए वाटर टैंक के लिए मदद की पेशकश की
विवाद के बाद कंपनी ने नए वाटर टैंक के निर्माण के लिए सामग्री उपलब्ध कराने पर सहमति जताई। इसके अलावा कंपनी अपने खर्च पर डीसिल्टिंग चैंबर और डैम बनाने तथा करीब 2,400 मीटर एचडीपीई पाइपलाइन, पंप और डीजी सेट उपलब्ध कराने को भी तैयार हुई।
हालांकि, आरोप है कि कुछ स्थानीय लोग डीसिल्टिंग चैंबर के निर्माण का ठेका अपनी पसंद के व्यक्ति को देने की मांग पर अड़ गए। इसी मांग को लेकर राष्ट्रीय महत्व की इस सड़क परियोजना का काम रोकने की स्थिति पैदा हो गई।
सुरक्षा नहीं मिलने पर कंपनी पहुंची हाईकोर्ट
कंपनी का कहना है कि उसने निर्माण कार्य जारी रखने के लिए स्थानीय प्रशासन से कई बार सुरक्षा की मांग की, लेकिन अपेक्षित मदद नहीं मिली। इसके बाद कंपनी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
अब अदालत के निर्देश के बाद किन्नौर प्रशासन के सामने निर्माण स्थल पर सुरक्षा सुनिश्चित करने और स्थानीय लोगों के साथ बातचीत कर विवाद सुलझाने की जिम्मेदारी है। यदि बातचीत से समाधान नहीं निकलता है, तो संबंधित लोगों के नाम और विवरण अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए जा सकते हैं। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्तूबर को होगी।
