हिमाचल प्रदेश में प्रतिबंधित सड़कों पर सरकारी वाहनों के उपयोग को लेकर सरकार सख्ती की तैयारी में है। मुख्य सचिव से लेकर अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और सचिव स्तर के अधिकारियों को अब प्रतिबंधित मार्गों पर आवाजाही के लिए केवल एक सरकारी वाहन का ही परमिट देने की व्यवस्था बनाई जा रही है। इससे एक ही अधिकारी के नाम पर कई विभागों की गाड़ियों के प्रतिबंधित मार्गों पर चलने की व्यवस्था पर रोक लगेगी। वर्तमान व्यवस्था में वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के पास जितने विभागों का जिम्मा है, उन विभागों की अलग-अलग सरकारी गाड़ियां प्रतिबंधित मार्गों पर दौड़ती हैं। सरकार ने इसे अनावश्यक मानते हुए नई व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। जानकारी के अनुसार गृह विभाग के पास विभिन्न विभागों और अधिकारियों की ओर से पांच हजार से अधिक वाहनों के परमिट आवेदन पहुंचे हैं।

नई नीति को अंतिम रूप दिए जाने तक इन आवेदनों पर निर्णय नहीं लिया गया है और संबंधित फाइलों को फिलहाल लंबित रखा गया है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद किसी अधिकारी को केवल एक वाहन के लिए ही प्रतिबंधित मार्ग पर चलने का परमिट मिलेगा। यदि किसी विभाग को अतिरिक्त वाहन की आवश्यकता होगी तो उसके लिए अलग से औचित्य बताना होगा और नियमानुसार अनुमति लेनी होगी। सरकार का मानना है कि इससे प्रतिबंधित मार्गों पर सरकारी वाहनों की संख्या कम होगी और परमिट प्रणाली अधिक पारदर्शी बनेगी। गृह विभाग इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश तैयार कर रहा है। प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिलने के बाद सभी विभागों को नई व्यवस्था के अनुरूप आवेदन करने के निर्देश जारी किए जाएंगे। इससे सरकारी वाहनों के दुरुपयोग पर भी अंकुश लगेगा और प्रतिबंधित मार्गों पर परमिट जारी करने की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित जवाबदेह बन सकेगी।