
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने चीफ इंजीनियर विमल नेगी मौत की जांच कमेटी के सदस्य एएसआई पंकज को पिछले 1 महीने से गैर तरीके से पुलिस की ओर से नजर बंद को चुनौती देने वाले मामले में सीबीआई से जवाब तलब किया है। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने दो सप्ताह के भीतर जवाब दायर करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को होगी। अदालत ने पिछले आदेश में याचिकाकर्ता को मामले में सीबीआई को पार्टी बनाने को कहा था।
याचिकाकर्ता एएसआई पंकज शर्मा ने हाईकोर्ट में पुलिस की ओर से पिछले 1 महीने से कैथू लाइन के गेस्ट हाउस के एक कमरे में 24 घंटे सीसीटीवी कैमरा और सिक्योरिटी गार्ड की निगरानी में गैर तरीके से हिरासत में रखने को लेकर हाईकोर्ट में एक याचिका के माध्यम से चुनौती दी है। पेश अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता को पिछले 1 महीने से जिस कमरे में रखा है। 24 घंटे सुरक्षा गार्ड साथ होता है और सीसीटीवी की निगरानी में नजरबंद किया हुआ है। यहां तक की उसे अपने परिवार वालों से भी मिलने नहीं दिया जा रहा है, जोकि संविधान के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
इसे लेकर याचिकाकर्ता ने पुलिस अधीक्षक संजीव गांधी को भी एक पत्र लिखकर अवगत कराया। एसपी गांधी ने इस पत्र को डीआईजी को भेजा, जिसमें उसकी अवैध हिरासत, निरंतर निगरानी और स्वतंत्रता में कटौती पर चिंता व्यक्त की गई थी। उक्त अभ्यावेदन में, उसने तत्काल हस्तक्षेप और अपनी गरिमा और स्वतंत्रता की बहाली की मांग की। याचिका में बताया गया है कि पूर्व डीजीपी अतुल वर्मा के कहने पर एएसआई पंकज की सुरक्षा के लिए एक सुरक्षाकर्मी तैनात किया गया है।
गौरतलब है कि 11 मार्च को हिमाचल प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीपीसीएल), विद्युत प्रभाग, शिमला के मुख्य अभियंता विमल नेगी के बारे में पुलिस स्टेशन सदर शिमला में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की गई थी। 24 मई से याचिकाकर्ता को चौबीसों घंटे सुरक्षा प्रदान करने के औपचारिक निर्देश जारी किए। इन निर्देशों के बाद, याचिकाकर्ता को जबरन पुलिस गेस्ट हाउस, कैथू के सेट संख्या 1 में ठहराया गया और 24 घंटे निगरानी में रखा गया। उनके कमरे में लगातार पुलिस गार्ड तैनात किया गया है और सीसीटीवी कैमरा लगाकर उन पर लगातार नजर रखी जा रही है। मई के अंत तक तथाकथित सुरक्षा व्यवस्था ने लगभग कारावास का रूप ले लिया। याचिकाकर्ता को भराड़ी स्थित अपने सरकारी आवास, जहां उसका परिवार रहता है, वहां जाने की अनुमति नहीं थी।
