हिमाचल प्रदेश में मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (एमआईएस) के तहत इस बार केवल एचपीएमसी ने ही सेब की सरकारी खरीद की है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार सरकारी हस्तक्षेप अधिक प्रभावी रहा है और खरीद का आंकड़ा भी बढ़ा है। इस वर्ष हिमफेड ने कोई खरीद नहीं की, जबकि एचपीएमसी ने आजादपुर मंडी नई दिल्ली में ‘ए’ ग्रेड सेब के थोक भाव में भी इस बार सुधार देखा गया। रॉयल डिलिशियस का भाव 2024 में इन दिनों औसत 1,180 रुपये प्रति बॉक्स था, जो 2025 में बढ़कर 1,900 रुपये पहुंच गया।

गोल्डन डिलिशियस का भाव 2024 में 768 रुपये से बढ़कर 1,450 रुपये हो गया। अकेले ही रिकॉर्ड स्तर पर एमआईएस के तहत सेब की खरीद की है। एचपीएमसी ने अब तक 95,453 मीट्रिक टन सेब खरीदा है। निदेशक बागवानी विनय सिंह ने इसकी पुष्टि की है। पिछले वर्ष एचपीएमसी और हिमफेड ने मिलकर कुल 35,333.49 मीट्रिक टन सेब की खरीद की थी। उससे पहले 2023 में 51,844.86 मीट्रिक टन सेब की खरीद की।

20 अक्तूबर 2025 तक हिमाचल प्रदेश के विभिन्न मंडी यार्डों के भीतर कुल 1.27 करोड़ स्टैंडर्ड बॉक्स सेब की खरीद फरोख्त हुई। राज्य के भीतर के यार्डों या बाहर की मंडियों में 2.72 करोड़ कार्टन सेब का कारोबार हुआ। पिछले वर्ष 2024 इसी अवधि तक यार्डों के भीतर 1.16 करोड़ और बाहर 87 लाख बॉक्स सेब की खरीद-फरोख्त हुई थी। यानी इस बार सेब का कुल कारोबार पिछले साल से कहीं अधिक रहा। इस साल एचपीएमसी ने 248 संग्रह केंद्र खोले। पिछले साल एचपीएमसी ने 96 और 2023 में 207 संग्रह केंद्र खोले। पिछले वर्ष हिमफेड ने 110 और 2023 में 103 खरीद केंद्र स्थापित किए थे।