छठी कक्षा की पुस्तक ‘हिमाचल की लोक संस्कृति और योग’ में त्रुटियां सामने के बाद हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने पुस्तक को दोबारा छापने का फैसला लिया है। बोर्ड ने इसके लिए विशेष कमेटी गठित कर दी है। ये पुस्तक की सामग्री की समीक्षा करेगी। समीक्षा पूरी होने के बाद संशोधित पुस्तक को फिर से प्रकाशित किया जाएगा।

पुस्तक में कई तथ्यात्मक और भाषाई गलतियां सामने आई थीं। सबसे अधिक विवाद उस समय हुआ, जब किन्नौर जिले के लोगों को ट्रांसजेंडर के रूप में दर्शाया गया। इसके अलावा मंडी जिले को वाणिज्यिक मंडी के तौर पर प्रस्तुत किया गया। मामले के तूल पकड़ने के बाद शिक्षा निदेशालय ने भी संज्ञान लेते हुए शिक्षा बोर्ड को किताब बदलने के निर्देश दिए थे। अब शिक्षा बोर्ड ने भी इसे बदलने का निर्णय लिया है।

उल्लेखनीय है कि अनुवाद के दौरान किसी एआई या ऑटो ट्रांसलेशन टूल का इस्तेमाल किया गया। उसने ‘किन्नौर’ को ‘किन्नर’ समझकर उसका अंग्रेजी अनुवाद ‘ट्रांसजेंडर’ कर दिया। वहीं ‘मंडी’ शब्द को बाजार के अर्थ में लेकर ‘मार्केट’ लिखा गया। सबसे हैरानी की बात यह रही कि पुस्तक छपकर स्कूलों तक पहुंच गई, लेकिन किसी स्तर पर इन त्रुटियों की जांच नहीं हुई। पुस्तक के पृष्ठ 16 पर जिलों के गठन से जुड़े प्रश्न में बिलासपुर, कांगड़ा, कुल्लू और डलहौजी के साथ ‘ट्रांसजेंडर’ शब्द विकल्प के रूप में छापा गया है, जबकि हिंदी संस्करण में वहां सही रूप से ‘किन्नौर’ लिखा है। इसके अलावा पृष्ठ 17 पर वर्ष 1972 की जगह ‘19712’ छाप दिया था।
छठी की पुस्तक में कुछ गलतियां थीं। इस पुस्तक की छपवाई अब शिक्षा बोर्ड नए सिरे से कर रहा है। पहले छपी पुस्तक की समीक्षा की जा रही है। उसके बाद इस पुस्तक को नए सिरे छपवा कर स्कूलों में भेजा जाएगा।- डॉ. मेजर विशाल शर्मा, सचिव, स्कूल शिक्षा बोर्ड, धर्मशाला