
अमर उजाला की ओर से आयोजित मेधावी छात्र सम्मान समारोह मंगलवार को शिमला में आयोजित हुआ। इस समारोह में प्रदेश भर से आए ऐसे विद्यार्थियों में कुछ ऐसे भी थे जिन्होंने न सिर्फ 12वीं में टॉप किया था, बल्कि 10वीं में भी कड़ी मेहनत से सफलता का परचम लहराया था। ये छात्र सिर्फ मार्कशीट के नंबरों में नहीं, अपने जीवन के उद्देश्य और सोच में भी अव्वल नजर आए। कुछ छात्रों ने जीवन में विषम परिस्थितियों का सामना कर सफलता प्राप्त की, तो कुछ ने अपनी रुचियों और जुनून को लक्ष्य बनाया। जानिए इन प्रेरणादायक युवाओं की कहानी उनकी जुबानी-
मैं जब 9वीं में थी, तब एक महिला जज से मिलने का मौका मिला। उस दिन से ठान लिया कि मुझे भी न्यायिक सेवा में जाना है। मैंने 10वीं में टॉप किया था और अब 12वीं में भी टॉप किया है। मेरा सपना सिर्फ नंबर तक सीमित नहीं है। मैं चाहती हूं कि मैं एक दिन सिविल जज बनूं और समाज में न्याय की अलख जगाऊं। मेरी मां मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा हैं। उन्होंने हमेशा मुझे सपनों के पीछे भागना सिखाया। कभी-कभी एक ही मुलाकात जीवन की दिशा तय कर देती है, मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ। मैं यह साबित करना चाहती हूं कि छोटे कस्बों की लड़कियां भी बड़ी ऊंचाई छू सकती हैं। –श्रुति, जीएसएसएस, चंबा
मैंने 10वीं एसवीएम कोटखाई से और 12वीं पोर्टमोर स्कूल से की। दोनों में टॉप किया। बचपन से ही मेरी रुचि कला में है। मैं आईएएस की ओर भी मेरा आकर्षण है। मैं चाहती हूं कि एक दिन मैं फाइन आर्ट पेंटर बनूं और समाज को कुछ अलग रूप में दिखा सकूं। अब मैं जेसीसी कॉलेज, चंडीगढ़ सेक्टर 11 में आगे की पढ़ाई कर रही हूं। मेरे लिए कला सिर्फ रंगों तक सीमित नहीं, ये मेरे व्यक्तित्व का हिस्सा है। कभी-कभी दिल और दिमाग दोनों की सुनना जरूरी होता है। मैं दोनों रास्तों पर चल रही हूं। –पार्थवी, पोर्टमोर
मैंने 11वीं-12वीं में साइंस और कॉमर्स दोनों स्ट्रीम एक साथ लीं। लोगों ने कहा कि ये बहुत मुश्किल है, लेकिन मुझे विश्वास था कि मैं कर सकता हूं। मेरा सपना है कि मैं बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में वैज्ञानिक बनूं। मैं देश के टॉप कॉलेजों में एडमिशन के लिए टेस्ट्स की तैयारी कर रहा हूं। मेरे स्कूल और घरवालों ने हमेशा मेरा साथ दिया और मुझे मोटिवेट किया। मुझे लगता है कि पढ़ाई में सीमाएं नहीं होनी चाहिए, अगर हौसला है तो सब संभव है। –आकर्ष, पीएम श्री जीएसएसएस पाडर
मेरे पिता चमन लाल का देहांत हो गया है। मां आंगनबाड़ी में शिक्षक हैं। घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। इसके बावजूद मैंने कभी हार नहीं मानी। मैं 10वीं में भी टॉपर थी और 12वीं में भी मेहनत से सफलता पाई। अब संजौली कॉलेज से बीए कर रही हूं। भविष्य में सिविल सर्विस की तैयारी करुंगी। मैंने देखा कि मां कितनी मेहनत करती हैं, बस वहीं से मेरी प्रेरणा शुरू हुई। सपने पूरे करने के लिए हालात से लड़ना पड़ता है, और मैं हर दिन लड़ रही हूं। –शगुन, एसवीएन, कुनिहार
मेरे पापा किसान हैं और मम्मी गृहिणी। उन्होंने कभी मेरी पढ़ाई नहीं रोकी। मैंने 10वीं में टॉप किया था। अब डॉक्टर बनने की तैयारी कर रही हूं। हालात आसान नहीं थे। कई बार रास्ते में रुकावटें आईं, लेकिन मैंने उम्मीद नहीं छोड़ी। मैं चाहती हूं कि गांव की लड़कियां भी ये जानें कि वो डॉक्टर बन सकती हैं। मुझे लोगों की सेवा करनी है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां डॉक्टर्स की कमी है। मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता, ये मैं अपने अनुभव से कह सकती हूं। -स्नेहा देवी, बिलासपुर
मैं इंजीनियर बनना चाहती हूं क्योंकि मुझे टेक्नोलॉजी और मशीनों में गहरी रुचि है। हमारे स्कूल के प्रिंसिपल सुनील कुमार ने हमेशा मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। अब मैं इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रही हूं। मैं बड़े संस्थान में जाना चाहती हूं। मुझे लगता है टेक्नोलॉजी वो ताकत है जो समाज को बदल सकती है। मैं एक ऐसा प्रोजेक्ट बनाना चाहती हूं जिससे आम लोगों की जिंदगी आसान हो। मैं अपनी मेहनत से अपने परिवार और शिक्षकों का नाम रोशन करुंगी। –दीक्षा, एसवीएम शिमला
मैं अभी आईआईटी मद्रास में बीएस डाटा एनालिसिस कर रही हूं। मेरा सपना हमेशा से ही बड़े संस्थान में पढ़ना और टेक्नोलॉजी में काम करना था। मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा मेरी मां हैं। उन्होंने कभी मुझ पर दबाव नहीं डाला। सिर्फ विश्वास किया। डाटा सिर्फ नंबर नहीं होते, वो इंसानों की कहानियां भी कहते हैं। आईआईटी में आना आसान नहीं था, लेकिन सपना बड़ा था, इसलिए मेहनत भी बड़ी की। मां कहती थीं, ‘तू कर सकती है’, और मैंने कर दिखाया। –जिया गुप्ता, ताराहाल
