शिमला। सोलन जिले के नालागढ़ में लंबे समय से अधूरे पड़े मेडिकल डिवाइस पार्क के निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए हिमाचल सरकार ने नई योजना तैयार की है। सरकार अब परियोजना में निवेश करने वाले उद्योगपतियों से कुल परियोजना लागत का करीब 45 फीसदी हिस्सा पहले ही लेगी, इसके बाद पार्क के अधूरे निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया जाएगा।
विधानसभा में नियम 130 के तहत भाजपा विधायक रणधीर शर्मा की ओर से युवाओं को रोजगार की गारंटी को लेकर लाए गए प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने सरकार की योजना की जानकारी दी।

पिछली व्यवस्था में सरकार को हो सकता था करोड़ों का नुकसान
उद्योग मंत्री ने बताया कि मेडिकल डिवाइस पार्क को लेकर पूर्व सरकार के कार्यकाल में कुछ ऐसे प्रावधान किए गए थे, जिनमें अब बदलाव किया गया है।


पूर्व सरकार ने पार्क में उद्योग स्थापित करने के इच्छुक निवेशकों को महज एक रुपये की लीज पर जमीन देने और तीन रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली उपलब्ध करवाने का प्रावधान किया था।
सरकार के आकलन के अनुसार इस व्यवस्था से प्रदेश को करीब 300 से 400 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान हो सकता था।
सस्ती बिजली उपलब्ध करवाने से ही करीब 200 करोड़ रुपये और एक रुपये की दर से भूमि लीज पर देने से 150 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान का अनुमान था।


अब उद्योगपतियों से पहले लिया जाएगा 45 फीसदी पैसा
उद्योग मंत्री ने कहा कि सरकार ने पूरी व्यवस्था की समीक्षा करने के बाद इसमें बदलाव करने का निर्णय लिया है। अब ऐसी व्यवस्था तैयार की जा रही है, जिससे मेडिकल डिवाइस पार्क का विकास भी हो और प्रदेश सरकार पर अनावश्यक वित्तीय बोझ भी न पड़े।
इसी योजना के तहत पार्क में निवेश करने वाले उद्योगपतियों से परियोजना लागत का करीब 45 फीसदी हिस्सा पहले लिया जाएगा। इसके बाद पार्क के अधूरे कार्यों को पूरा किया जाएगा।
सरकार का उद्देश्य पार्क के निर्माण को आगे बढ़ाने के साथ-साथ राज्य के वित्तीय हितों को भी सुरक्षित रखना है।


ऊना में बल्क ड्रग पार्क का काम मार्च तक शुरू करने का लक्ष्य
वहीं ऊना में प्रस्तावित बल्क ड्रग पार्क को लेकर भी सरकार ने अपना लक्ष्य सामने रखा है। सरकार का लक्ष्य है कि इसका निर्माण कार्य मार्च तक शुरू कर दिया जाए।


बल्क ड्रग पार्क के बनने से प्रदेश में फार्मा क्षेत्र में निवेश के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। इसके साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।


हिमाचल में 1,526 स्कूल किए गए डिनोटिफाई
विधानसभा में चर्चा के दौरान शिक्षा विभाग से जुड़ी जानकारी भी सामने आई। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने बताया कि प्रदेश में कुल 1,526 स्कूलों को डिनोटिफाई किया गया है।


इनमें 734 स्कूल ऐसे थे, जहां एक भी विद्यार्थी नामांकित नहीं था। इन स्कूलों को डिनोटिफाई करने के बाद सरकार को करीब 2,170 शिक्षक उपलब्ध हुए हैं।


सरकार के अनुसार प्राथमिक स्कूलों को दो किलोमीटर और मिडल स्कूलों को तीन किलोमीटर के दायरे में मर्ज किया गया है।
इसके अलावा एक कॉलेज को भी बंद किया गया है। सरकार का कहना है कि महज दो या छह विद्यार्थियों के लिए कॉलेज संचालित करना व्यावहारिक नहीं था।


मेडिकल डिवाइस पार्क और बल्क ड्रग पार्क जैसी परियोजनाओं के जरिए सरकार प्रदेश में निवेश और रोजगार बढ़ाने पर जोर दे रही है, जबकि दूसरी ओर स्कूलों के युक्तिकरण के माध्यम से उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने की कोशिश की जा रही है।