38वें राष्ट्रीय खेलों में पंजाब और हरियाणा की दो महिला खिलाड़ियों को हिमाचल प्रदेश की हैंडबाल टीम से खिलाने का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। इस लेकर कोर्ट में हिमाचल की राष्ट्रीय हैंडबाल महिला खिलाड़ियों की ओर से एक याचिका दायर की गई है। सोमवार को सुनवाई के दौरान न्यायाधीश अजय मोहन की अदालत ने मामले में राज्य सरकार, भारतीय ओलंपिक संघ, प्रदेश ओलंपिक संघ, प्रदेश हैंडबाल एसोसिएशन सहित हैंडबाल की कोच को दस्ती नोटिस जारी कर जवाब दायर करने के निर्देश दिए हैं। मामले की सुनवाई 18 अगस्त को होगी। इस दिन याचिकाकर्ताओं की अंतरिम प्रार्थना पर विचार किया जाएगा। अदालत ने यह आदेश पूनम कुमारी और अन्य बनाम हिमाचल प्रदेश मामले में दिए।

याचिका में आरोप लगाए गए हैं कि जब राष्ट्रीय गेम्स के लिए प्रदेश में खिलाड़ियों की चयन प्रक्रिया की जा रही थी, उस समय हिमाचल हैंडबाल टीम में प्रदेश के बजाय दूसरे राज्य की खिलाड़ियों का चयन किया गया। जब खिलाड़ियों को इस बात का पता चला तो उन्होंने इसकी आपत्तियां कमेटी के समक्ष दायर की, लेकिन कमेटी ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। याचिका में बताया गया है कि टीम में नियुक्ति के लिए दो शर्तें तय की गई थी,जिनमें से पहले शर्त थी कि हिमाचल की निवासी हो और दूसरी कम से कम वह 6 महीने से हिमाचल में रह रही हो। जो महिला खिलाड़ी हिमाचल टीम से खिलाई गई वह दूसरे राज्य से संबंध रखती थीं। इसकी वजह से हिमाचल की महिला खिलाड़ियों को राष्ट्रीय गेम्स में खेलने से वंचित किया गया।

 प्रदेश हाईकोर्ट ने शिमला में पुलिस अधीक्षक संचार और तकनीकी सेवाओं के पद पर कार्यरत राजेश वर्मा के तबादले पर रोक लगा दी है। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवॉल दुआ की अदालत ने 14 मई के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसके तहत याचिकाकर्ता का तबादला कंपल्सरी वेटिंग ऑफिसर के रूप में किया गया था। अदालत ने कहा कि यह तबादला हिमाचल प्रदेश पुलिस अधिनियम 2007 की धारा 56 का उल्लंघन है। अदालत ने पाया कि पुलिस संचार और तकनीकी सेवा एक अलग कैडर है, जिसके अपने भर्ती और पदोन्नति नियम हैं और इसमें पुलिस अधीक्षक का केवल एक पद है। याचिकाकर्ता ने अपने तबादले को चुनौती थी। उन्होंने तर्क दिया कि सीडब्ल्यूओ का पद उनके कैडर का हिस्सा नहीं है और उनका तबादला पुलिस स्थापना समिति की सिफारिश के बिना किया गया है।