शिमला: देश की सेवा करने के बाद सेवानिवृत्त होने वाले पूर्व सैनिकों के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार ने सरकारी सेवाओं में 15 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था की है। यह आरक्षण क्लास-1, क्लास-2, क्लास-3 और क्लास-4 के सरकारी पदों पर उपलब्ध होगा।


सरकार के अनुसार पूर्व सैनिकों को उनकी योग्यता और सैन्य अनुभव के अनुरूप रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने के लिए सैनिक कल्याण विभाग के तहत विशेष रोजगार प्रकोष्ठ भी स्थापित किया गया है। यह प्रकोष्ठ पूर्व सैनिकों को सरकारी पदों की जानकारी देने और उनकी योग्यता के अनुसार रोजगार के अवसर तलाशने में मदद करेगा।


मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि पूर्व सैनिकों ने देश की सुरक्षा में अपना महत्वपूर्ण समय और जीवन दिया है। सेवानिवृत्ति के बाद उनके अनुभव, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता का प्रदेश के विकास में उपयोग किया जा सकता है। सरकार का उद्देश्य पूर्व सैनिकों को सम्मान के साथ रोजगार और आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध करवाना है।


प्रदेश में वर्तमान में करीब 1,33,557 पूर्व सैनिक हैं। इसके अलावा 40,004 सैन्य विधवाएं और 991 युद्ध विधवाएं भी हैं। सरकार की ओर से इनके कल्याण के लिए रोजगार के साथ-साथ शिक्षा, आर्थिक सहायता और अन्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने की बात कही गई है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि सैनिकों और उनके परिवारों का सम्मान केवल वीरता पुरस्कारों तक सीमित नहीं होना चाहिए। देश की रक्षा में योगदान देने वाले पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य उपलब्ध करवाना भी सरकार की जिम्मेदारी है।


इसी उद्देश्य से राज्य सरकार सैनिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने पर विशेष ध्यान दे रही है। 15 फीसदी आरक्षण और विशेष रोजगार प्रकोष्ठ की व्यवस्था से पूर्व सैनिकों को सेवानिवृत्ति के बाद रोजगार के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।