घुमारवीं के कसारू में करीब 400 बीघा पर प्रदेश की पहली डिजिटल यूनिवर्सिटी बनेगी। 250 बीघा वन भूमि है और करीब 150 बीघा निजी भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। सरकार ने जमीन चिन्हित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यूनिवर्सिटी के लिए कसारू क्षेत्र में लगभग 400 बीघा भूमि देखी जा रही है। जमीन का जल्द अधिग्रहण किया जाएगा।

यह विश्वविद्यालय पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) और सेल्फ फाइनेंस मोड पर विकसित किया जाएगा। पूरी यूनिवर्सिटी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आधारित होगी, जहां छात्रों को पेपरलेस कोर्स, ऑनलाइन लर्निंग और उद्योग आधारित सिलेबस मिलेगा। यूनिवर्सिटी में छात्रों को कहीं से भी, कभी भी डिजिटल माध्यम से शिक्षा प्राप्त करने की सुविधा होगी। इसके लिए एक विशेष डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म विकसित किया जाएगा। यह संस्थान पारंपरिक विश्वविद्यालयों की तुलना में कहीं अधिक लचीला, तकनीकी और किफायती होगा। यहां छात्रों को आईटी प्रबंधन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, मशीन लर्निंग, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सिक्योरिटी, डिजिटल मार्केटिंग, फैशन डिजाइनिंग, ऑटोमोबाइल रिपेयरिंग जैसे विषयों में डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स करवाए जाएंगे। छात्रों को न केवल शिक्षा मिलेगी, बल्कि इंडस्ट्री-रेडी बनाने के लिए इंटर्नशिप और लाइव प्रोजेक्ट्स से जोड़ा जाएगा।

यूनिवर्सिटी में रिसर्च और इनक्यूबेशन सेंटर भी होंगे, जहां छात्र अपने विचारों को स्टार्टअप में बदल सकेंगे। सरकार का लक्ष्य प्रदेश में स्टार्टअप संस्कृति को मजबूती देना है और युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करना है। इस डिजिटल यूनिवर्सिटी की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के छात्र बिना भेदभाव के शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। आधुनिक तकनीकों और डिजिटल पाठ्यक्रमों के जरिए उन्हें विश्वस्तरीय स्किल्स से लैस किया जाएगा, जिससे वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम होंगे।

परियोजना पर काम शुरू कर दिया है। जमीन देखी जा रही है। वन भूमि के लिए एफसीए की प्रक्रिया शुरू हुई है। यह विश्वविद्यालय प्रदेश में तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा। विश्वविद्यालय छात्रों को आधुनिक तकनीकों, नवाचार, व्यावसायिक शिक्षा के माध्यम से भविष्य के लिए तैयार करेगा। – राजेश धर्माणी, तकनीकी शिक्षा मंत्री